देहरादून: AYUSH SETU PORTAL उत्तराखंड में देश की पहली योग नीति 21 जून 2025 को लागू हो चुकी है. इसके बाद से ही इस योग नीति में दिए गए प्रावधानों के तहत काम किया जा रहे हैं. उत्तराखंड योग पॉलिसी 2025 में योगिया प्राकृतिक चिकित्सा निदेशालय की स्थापना के साथ ही ऑनलाइन योग प्लेटफार्म की स्थापना भी की जानी थी. ऐसे में आयुष एवं आयुष शिक्षा विभाग ने आयुष सेतु पोर्टल (Ayush Setu portal) तैयार कर लिया है. इस पोर्टल का शनिवार को आयुष मंत्री मदन कौशिक ने शुभारंभ किया.
इस पोर्टल के लॉन्च होने के बाद योग वेलनेस केंद्रों का पंजीकरण एवं प्रमाणन की व्यवस्था आसान हो जाएगी. आयुष विभाग की ओर से तैयार की गई आयुष सेतु पोर्टल www.ayushwellness.uk.gov.in के जरिए अब ऑनलाइन योग वैलनेस केंद्रों का पंजीकरण कराया जा सकेगा.
महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा आयुष सेतु पोर्टल: दरअसल, प्रदेश में सैकड़ो की संख्या में पंचकर्म, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा आधारित वैलनेस सेंटर्स संचालित हो रहे हैं ऐसे में इन सभी सेंटर्स को पंजीकरण एवं प्रमाणन करवाना अनिवार्य है, जिसमें आयुष सेतु पोर्टल काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. इसके अलावा इस एकीकृत आयुष सेतु पोर्टल के जरिए, योग केंद्रों के लिए वन टाइम कैपिटल सब्सिडी के लिए आवेदन, योगा ट्रेनर फीस रीइंबर्समेंट के लिए आवेदन, योग सर्टिफिकेशन बोर्ड एग्जामिनेशन फीस रीइंबर्समेंट के लिए आवेदन, आयुष अस्पताल के लिए एनएबीएच फीस रीइंबर्समेंट के लिए आवेदन समेत योग रिसर्च ग्रांट के लिए आवेदन कर ऑनलाइन अनुमति ली जा सकेगी.
नहीं काटने होंगे दफ्तरों के चक्कर
यही वजह है कि उत्तराखंड राज्य को योग एवं वैलनेस का हब बनाने की दिशा में आयुष विभाग का एकीकृत पोर्टल, आयुष सेतु पोर्टल काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है. क्योंकि इसके लिए अब लोगों को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे बल्कि एक ही प्लेटफार्म पर आवेदन कर सकेंगे. इस पोर्टल में प्रशासनिक व्यवस्था को भी शामिल किया गया है, जिसमें जिला स्तर पर आवेदन की प्रारंभिक जांच और फिजिकल वेरिफिकेशन के साथ ही मॉनिटरिंग की जाएगी.
उत्तराखंड योग पॉलिसी 2025
इसके अलावा निदेशालय स्तर पर फाइनल अप्रूवल और पूरे पोर्टल की गतिविधियों का प्रबंधन एवं उसकी मॉनिटरिंग की जाएगी. बता दें कि उत्तराखंड राज्य को योग एवं वैलनेस की वैश्विक राजधानी के रूप में विकसित किए जाने को लेकर साल 2025 में उत्तराखंड योग पॉलिसी 2025 लागू की गई थी. इस नीति में योग संस्थाओं का शत प्रतिशत रजिस्ट्रेशन के साथ ही उसकी गुणवत्ता और मानकों के लिए नियम बनाए गए हैं.
प्रदेश में पांच योग हब्स की स्थापना भी की जानी है
योग पॉलिसी के तहत साल 2030 तक प्रदेश में पांच योग हब्स की स्थापना भी की जानी है, जिसमें कोलीढेक, व्यास/दारमा/चौदांस घाटी, टिहरी झील, मुक्तेश्वर और जागेश्वर को योग हब्स के रूप में विकसित किए जाने का लक्ष्य है. इसके अलावा इस नीति के तहत ऑनलाइन योग प्लेटफार्म की स्थापना के साथ ही योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा निदेशालय की स्थापना का प्रावधान है.
योग केंद्र की स्थापना पर मिलेगी वित्तीय सहायता
प्रदेश को योग एवं वैलनेस की वैश्विक राजधानी के रूप में विकसित किए जाने को लेकर योग पॉलिसी में वित्तीय प्रावधान भी किए गए हैं, जिसमें योग एवं ज्ञान केदो के लिए पूंजीगत अनुदान की व्यवस्था है. ऐसे में योग केंद्र की स्थापना पर पर्वतीय क्षेत्रों में 50 फ़ीसदी अधिकतम 20 लाख और मैदानी क्षेत्रों में 25 फीसदी तक अधिकतम 10 लाख रुपए की वित्तीय सहायता दी जाएगी. योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा क्षेत्र में रिसर्च के लिए संस्थाओं को 10 लाख रुपए तक की प्रति परियोजना शोध अनुदान दिया जाएगा.
होम स्टे, होटल, रिजॉर्ट, स्कूल और कॉलेज में योग केंटो की स्थापना को प्रोत्साहन के साथ ही योग शत्रु के आयोजन के लिए वित्तीय सहायता अधिकतम 15 हज़ार रुपए दी जाएगी. यही नहीं, योगा सर्टिफिकेशन बोर्ड प्रमाणन को प्राथमिकता और योगा सर्टिफिकेशन बोर्ड प्रमाणित योग प्रशिक्षको को परीक्षा शुल्क की प्रतिपूर्ति की जाएगी.
पोर्टल पर मिलेगी सभी जानकारी: वहीं, ज्यादा जानकारी देते हुए आयुष मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि आयुष विभाग की ओर से तैयार किया गया आयुष सेतु पोर्टल लॉन्च हो गया है, जिसमें योग पॉलिसी से संबंधित हर तरह की जानकारी उपलब्ध है. इसके साथ ही इस पोर्टल के जरिए अब आसानी से रजिस्ट्रेशन और सर्टिफिकेशन की सुविधा लोगों को प्राप्त होगी. इसके अलावा, योग नीति में दिए गए वित्तीय अनुदान के प्रावधानों की जानकारी भी उपलब्ध है.
साथ ही कहा कि प्रदेश में जो नए योग केंद्र खुलेंगे उनको प्रशिक्षित युवाओं की सूची भी उपलब्ध कराई जाएगी. ताकि योग प्रशिक्षित लोगो को रोजगार उपलब्ध कराया जा सके. वही, आयुष विभाग की सचिव रंजना राजगुरु ने कहा कि साल 2025 में जो योग नीति लागू हुई थी, उसके तहत एक एकीकृत पोर्टल यानी आयुष सेतु पोर्टल लॉन्च किया गया है. जिसमें योग नीति के साथ ही पर्यटन और उद्यम विभाग से मिलने वाली सब्सिडी की सारी जानकारियां उपलब्ध है.
इसके अलावा, योग केंद्रों के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के साथ ही उनके सर्टिफिकेशन की व्यवस्था भी इसमें की गई है. ऐसे में लोग घर बैठे ही योग नीति के तहत दिए जा रहे लाभ को जान सकते हैं. साथ ही रजिस्ट्रेशन के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. साथ ही कहा कि भविष्य में खुलने वाले योग एवं वैलनेस केंद्रों के साथ ही वर्तमान समय में संचालित सभी योग केंद्रों को भी रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य है.




















