कोलकाता। Jyoti Priya Mallick resignation : पश्चिम बंगाल की पुूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) में चल रहा अंदरूनी संकट और गहरा गया है। शुक्रवार को पार्टी के दो बड़े नेताओं पूर्व राज्य मंत्री ज्योति प्रिय मल्लिक और सिलीगुड़ी के मेयर गौतम देब ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है।
हाल ही में हुए 2026 के विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में भाजपा के हाथों मिली करारी हार के बाद से ममता बनर्जी की पार्टी में विद्रोह, इस्तीफों और बगावत का दौर चल रहा है। यह टीएमसी के 28 साल के इतिहास का सबसे बड़ा संकट माना जा रहा है।
ज्योति प्रिय मल्लिक का इस्तीफा और बीमारी का हवाला
ममता बनर्जी के बेहद करीबी और पुराने साथी ज्योति प्रिय मल्लिक ने खराब सेहत का हवाला देते हुए टीएमसी के सभी संगठनात्मक पदों (पार्टी वर्किंग कमेटी) से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में मेरी सेहत बहुत ज्यादा बिगड़ गई है।
उन्होंने कहा कि मेरा ब्लड शुगर लेवल असामान्य रूप से बढ़ गया है और मैं किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहा हूं। ऐसी स्थिति में पार्टी की जिम्मेदारियां संभालना नामुमकिन है। जब आप काम नहीं कर सकते, तो पद पर बने रहने का कोई मतलब नहीं है। हालांकि चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ ही दिन पहले ममता बनर्जी ने पार्टी में बड़ा फेरबदल करते हुए मल्लिक को दोबारा अपनी वर्किंग कमेटी में शामिल किया था।
ज्योति प्रिय मल्लिक का राजनीतिक सफर और विवाद
बता दें कि ज्योति प्रिय मल्लिक पांच बार के विधायक (MLA) रहे हैं और उत्तर 24 परगना जिले में पार्टी के सबसे मजबूत नेता माने जाते थे। वे 2011 से 2021 तक राज्य के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री और उसके बाद तीन साल तक वन मंत्री रहे।
अक्टूबर 2023 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें कथित राशन वितरण घोटाले में गिरफ्तार किया था। वे 15 महीने जेल में रहने के बाद जनवरी 2025 में जमानत पर बाहर आए थे।
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