देहरादून: BADRINATH DHAM उत्तराखंड में चारोंधाम में से आखरी बचे बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है. आज भगवान बदरी विशाल के दरबार में कपाट बंद होने की प्रक्रिया के तहत पंचपूजायें शुरू हो गई हैं. पौराणिक परंपरा के अनुसार पहले दिन विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आज देर शाम गणेश जी के कपाट विधिवत रूप से बंद कर दिए गए.
Roorkee : मुख्यमंत्री धामी पाँच दिवसीय धार्मिक एवं सामाजिक महोत्सव में हुए सम्मिलित
इससे पहले आज सुबह गणेश जी की मूर्ति को उनके परिसर स्थित मंदिर से श्री बदरीनाथ मंदिर गर्भ गृह में दर्शनार्थ रखा गया. आज पांच बजे गणेश मंदिर कपाट शीतकाल के लिए बंद हो गये. बदरीनाथ – केदारनाथ मंदिर समिति ( बीकेटीसी) अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा बदरीनाथ धाम के कपाट बंद करने की तैयारियां चल रही हैं.
पंच पूजा प्रक्रिया के अनुसार रावल अंबरनाथ नंबूदरी सहित धर्माधिकारी राधाकृष्ण थपलियाल, प्रभारी धर्माधिकारी स्वयंबर सेमवाल, वेदपाठी रविंद्र भट्ट एवं अमित बंदोलिया ने पूजा-अर्चना संपन्न की. इस अवसर पर बीकेटीसी उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती तथा बीकेटीसी मुख्य कार्याधिकारी/ कार्यपालक मजिस्ट्रेट विजय प्रसाद थपलियाल सहित प्रभारी अधिकारी विपिन तिवारी, मंदिर अधिकारी राजेंद्र चौहान,प्रशासनिक अधिकारी कुलदीप भट्ट आदि मौजूद रहे.
बीकेटीसी मीडिया प्रभारी हरीश गौड़ ने बताया पंच पूजा के दूसरे दिन शनिवार को आदि केदारेश्वर तथा आदिगुरु शंकराचार्य मंदिर के कपाट बंद होंगे. तीसरे दिन रविवार 23 नवंबर को वेद ऋचाओं का वाचन बंद हो जायेगा. चौथे दिन 24 नवंबर को माता लक्ष्मी जी को आमंत्रण और 25 नवंबर दिन में 2 बजकर 56 मिनट पर भगवान बदरीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिये जाएंगे.
बता दें चारधाम में सबसे पहले गंगोत्री धाम के कपाट 22 अक्टूबर को बंद हुये. इसके बाद 23 अक्टूबर को यमुनोत्री और केदारनाथ धाम के कपाट बंद हुये. अब 25 नवंबर को बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होंगे. जिसका तैयारी चल रही हैं.




















