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जिंदगी का सबसे बड़ा लक्ष्य

अच्छे और सच्चे रिश्ते रखते हैं खुशहाल और सेहतमंद

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जिंदगी का सबसे बड़ा लक्ष्य

एक हालिया सर्वे में युवाओं से पूछा गया कि उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा लक्ष्य क्या है? 80 फीसदी ने जवाब दिया कि वे धनवान बनना चाहते हैं, जबकि उन्हीं में से 50 फीसदी ने कहा कि उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा लक्ष्य मशहूर बनना है। लेकिन 75 वर्ष तक चले एक शोध का निष्कर्ष कुछ और है। इसका निष्कर्ष है कि रिलेशनशिप में इन्वेस्ट करना, जिंदगी का सबसे बड़ा लक्ष्य होना चाहिए :

जिंदगी के बारे में हमें कब मालूम पड़ता है?

हमें अक्सर कहा जाता है कि मेहनत से काम करें, खूब काम करें और ज्यादा-से-ज्यादा हासिल करें। हमें विश्वास दिलाया जाता है कि ये ही वे चीजें हैं, जिनके पीछे पड़ने से जिंदगी अच्छी हो जाएगी। लेकिन इंसान की जिंदगी के बारे में हमें कब मालूम पड़ता है?

बेशक जब हम उसके अतीत को खंगालते हैं। लेकिन जब आप लोगों से उनके भूत यानी पास्ट के बारे में पूछते हैं तो वे उसका अधिकतर हिस्सा भूल चुके होते हैं। उन्हें कुछ मुख्य बातें ही ध्यान रहती हैं। ऐसे में जरा सोचिए कि ऐसी कोई स्टडी होती, जिसमें किसी इंसान के पूरे जीवन सफर का हिसाब रखा जाता और फिर पता किया जाता कि कि वे क्या चीजें हैं जिनसे इंसान खुशहाल और सेहतमंद रहता है!

सबसे लंबे वक्त की स्टडी

जी हां, कुछ ऐसा ही किया गया है। द हार्वर्ड स्टडी ऑफ अडल्ट डिवेलपमेंट शायद इंसान की जिंदगी के बारे में की गई सबसे लंबे वक्त की स्टडी होगी। इसके लिए 75 बरसों तक 724 लोगों की जिंदगी की स्टडी की गई। इसमें उनके काम, उनकी जिंदगी, उनकी सेहत और तमाम मुद्दों का रेकॉर्ड रखा गया। 1938 में शुरू की गई इस स्टडी में दो ग्रुप के लोगों को शामिल किया गया था।

पहला ग्रुप उन लोगों का था जो हार्वर्ड कॉलेज के स्टूडेंट थे। उन्होंने सेकंड वर्ल्ड वॉर के दौरान अपना कॉलेज खत्म किया था और फिर युद्ध के मैदान में लड़ने भी गए। दूसरा ग्रुप बोस्टन के उन बच्चों का था जो बेहद गरीब थे और जिनकी जिंदगी में मुश्किलें भरी हुई थीं।

स्टडी

स्टडी में जब इन्हें शामिल किया गया तो उनका पहले इंटरव्यू हुआ, फिर मेडिकल चेकअप भी कराया गया। शोधकर्ता उनके घर गए और उनके पैरंट्स का इंटरव्यू किया। बड़े होकर ये फैक्ट्री वर्कर से लेकर डॉक्टर, इंजिनियर और अमेरिका के राष्ट्रपति तक बने। कुछ नशे के गुलाम हो गए।

अच्छी रिलेशनशिप रखती हैं खुश और सेहतमंद

कुछ को सीजोफ्रेनिया हो गया, कुछ समाज में चोटी के लोग बन गए। तो शोधकर्ताओं ने इतने बरसों और इतने लोगों की स्टडी में क्या पाया? इस स्टडी के नतीजों में तमाम बातें सामने आईं, लेकिन पूरी स्टडी का सबसे मजबूत संदेश था कि अच्छी रिलेशनशिप हमें खुश और सेहतमंद रखती हैं।

स्टडी के दौरान रिलेशनशिप के बारे में तीन अहम चीजें देखी गईं

पहलीः सामाजिक रिश्ते हमारे लिए बहुत अच्छे होते हैं और अकेलापन हमें खाने को दौड़ता है। स्टडी से पता चला कि जो लोग परिवार, दोस्त, कम्युनिटी के साथ सामाजिक तौर पर बेहतर ढंग से जुड़े हुए हैं, वे ज्यादा खुश हैं और उनकी सेहत भी दूसरों के मुकाबले बेहतर रहती है। अकेले रहने के परिणाम बेहद खराब पाए गए। पाया गया कि जो न चाहते हुए भी अकेले हैं, वे भी कम खुश रहते हैं। उनकी सेहत मिडलाइफ में गिरने लगती है। उनका दिमाग भी बीच में काम करना कम कर देता है।

बड़ी सीख

एक बड़ी सीख यह रही कि आप भीड़ में भी अकेला महसूस कर सकते हैं और शादीशुदा होकर भी। इसलिए स्टडी में दूसरी जो सबसे बड़ी बात सामने आई वह यह थी कि यह सिर्फ संख्या की बात नहीं है कि आपके कितने दोस्त हैं, दोस्ती में आप कमिटेड हैं या नहीं, बल्कि असल बात यह है कि जिन लोगों के साथ आपकी दोस्ती या रिश्ते हैं, उनमें से कितनों के साथ आपकी प्रगाढ़ता यानी घनिष्ठता है। रिलेशनशिप की क्वॉलिटी अहमियत रखती है।

पता चला कि

स्टडी में यह पता चला कि अगर आप द्वंद्व में जीते हैं, तो वह आपकी सेहत के लिए बहुत खराब होता है। शादी में अगर बहुत ज्यादा उलझन हो, उसमें प्यार नहीं हो तो वह सेहत के लिए बहुत बुरा साबित होता है, शायद तलाक से भी ज्यादा नुकसानदेह। लेकिन अगर आपके रिश्ते अच्छे हैं और उनमें गर्मजोशी है तो आपका जीवन आनंदमय है।

अच्छा रिश्ता दिमाग की भी करता है रक्षा

तीसरी जो बात इस स्टडी में सामने आई वह यह थी कि अच्छा रिश्ता न सिर्फ हमारे शरीर को बचाता है बल्कि वह हमारे दिमाग की भी रक्षा करता है। स्टडी से पता कि अगर आप 80 साल की उम्र के हैं और आप अपने रिश्ते को लेकर सुरक्षित महसूस करते हैं, तो यह बात आपको बचाने का काम करती है। ऐसे लोग 80 के पार हो जाने के बाद इस अहसास के साथ जीते हैं कि कोई है, जिस पर वे मुश्किल के वक्त भरोसा कर सकते हैं।

याद्दाश्त रहती है बेहतर

इससे उनकी याद्दाश्त बहुत बेहतर रहती है। लेकिन जिनके पास कोई ऐसा नहीं होता जिस पर वे भरोसा कर सकें, ऐसे लोगों की याद रखने की क्षमता जल्दी खराब होने लगती है। बुढ़ापे में पति-पत्नी के बीच लड़ाई हो सकती है और वे दिन भर लड़ सकते हैं, लेकिन जब तक उन्हें यह विश्वास रहता है कि वे दोनों एक-दूसरे पर भरोसा कर सकते हैं तो उनकी लड़ाई का असर उनके दिमाग पर नहीं पड़ता।

कुल मिलाकर दशकों तक चली इस स्टडी का मेसेज यह है कि अच्छे और भरोसेमंद रिश्ते हमारी सेहत और जीवन में आनंद के लिए जरूरी हैं।

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