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बनारस जाएं तो इन जगहों पर जाना न भूलें

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varanasi

अगर आप धार्मिक नगरी बनारस घूमने जा रहे हैं तो क्या आप सिर्फ मंदिर, घाट, बीएचयू ही देखेंगे? अमूमन लोग बनारस घूमने जाते हैं तो सिर्फ घाट, मंदिर और बीएचयू ही देखकर वापस आ जाते हैं लेकिन बनारस में इसके अलावा भी घूमने को काफी कुछ है और उसके आस-पास भी।

अगर आप बनारस जा ही रहे हैं तो एक-दो दिन का वक्त और निकालिए। यकीन कीजिए बनारस के आस-पास मौजूद इन जगहों को देखे बिना आपकी यात्रा अधूरी ही रह जाएगी।

1. सारनाथ

यह बौद्ध धर्म का एक पवित्र स्थान है। यह बनारस से 10 किमी दूर है। इसका आकर्षण इस तरह है कि दुनियाभर से लोग यहां घूमने आते हैं।

2. कुश्ती अखाड़ा

अगर आप बनारस जा रहे हैं तो अखाड़े देखना न भूलें। कुश्ती करते युवाओं को देखकर आप में खुद ही जोश आ जाएगा।

3.चुनार का किला

यह बनारस से 37 किमी दूर है। इसके दोनों ओर गंगा नदी बहती है। किले की बनावट देखकर ही आप इलाके की गौरव-गाथा का अंदाजा लगा लेंगे।

4. रामनगर

रामगनर के किले को आपने कई फिल्मों में देखा होगा। अस्सी घाट पर खड़े होकर आप आसानी से रामनगर का किला देख सकते हैं लेकिन इसकी भव्यता देखने के लिए आपको एकबार तो इन जगहों पर जरूर जाना चाहिए।

बुद्ध के लिए बेची जायदाद, देश भी छोड़ दिया

रॉबिन शर्मा की बेस्टसेलर किताब ‘द मंक हू सोल्ड हिज फरारी’ का नाम तो आपने सुना ही होगा। बहुत मुमकिन है कि आपने यह किताब पढ़ी भी हो। लेकिन इस खबर में आप एक ऐसे शख्स के बारे में जानेंगे जिन्होंने बुद्ध की भक्ति और बौद्ध धर्म के स्नेह में अपनी कार और जायदाद बेच दी। इतना ही, वह अपना देश छोड़कर भारत आ गए और यहीं रह रहे हैं।
वियतनाम के रहने वाले डोन लाम तान सारनाथ में रहते हैं। सारनाथ ही वह जगह है जहां बुद्ध ने पहली बार उपदेश दिया था। यही वह जगह है जहां बौद्ध संघ अस्तित्व में आया था। तान ने सारनाथ में बुद्ध का एक खूबसूरत मंदिर बनवाया है। स्थानीय लोग इसे ‘गुलाबी मंदिर’ कहते हैं।

एक सपने ने बदली जिंदगी

30 साल की उम्र में तान के दिल को 2 बातें छू गईं और इसी ने उनकी जिंदगी बदल दी। वह बताते हैं, ‘एक बौद्ध भिक्षु ने मुझे बहुत अच्छी नौकरी की पेशकश की, लेकिन मेहनताने के तौर पर वह काफी कम पैसा दे रहे थे। मेरे गुजारे के लिए वह रकम काफी कम थी। इसीलिए मैंने उन्हें इनकार कर दिया। लेकिन इनकार करने के बाद मुझे अजीब सी बेचैनी महसबस होने लगी। मैं रात को ठीक से सो नहीं पाता था और बहुत उदासी महसूस करता था। फिर एक दिन मैंने एक सपना देखा।’
तान आगे बताते हैं, ‘मैंने सपने में बुद्ध को अपने पास महसूस किया। वह एक बौद्ध भिक्षु के रूप में थे। उन्होंने मुझसे कहा कि मैं जीवन और मृत्यु के इस चक्र में फंस गया हूं और जिस काम के लिए मेरा जन्म हुआ है, उसे ही पूरा नहीं कर रहा। उस आवाज ने मुझसे कहा कि मैं भारत चला जाऊं।’

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