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सहमति नहीं बन पाने के कारण तीन तलाक बिल टला

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uknews-Triple Talaq Bill Deferred Again

नई दिल्ली: राज्यसभा में आम सहमति नहीं बन पाने के कारण मॉनसून सत्र के आखिरी दिन तीन तलाक बिल टाल दिया गया। शुक्रवार को राज्यसभा के चेयरमैन वेंकैया नायडू ने कहा कि बिल पर सदन में एकता नहीं है इसलिए इसे आज नहीं रखा जाएगा। एक दिन पहले ही केंद्रीय कैबिनेट ने बिल में संशोधनों को मंजूरी दी थी। माना जा रहा है कि अब इसे शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा।

हालांकि सरकार के पास इस पर अध्यादेश लाने का भी विकल्प है। जानकारों का कहना है कि राज्यसभा में तीन तलाक बिल पेश करने की कोशिश से बीजेपी के पास अब कांग्रेस को घेरने का मौका मिल गया है।

आपको बता दें कि मॉनसून सत्र के आखिरी दिन कांग्रेस सदस्यों के हंगामे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। 2.30 बजे जब राज्यसभा की कार्यवाही फिर शुरू हुई तो सभापति ने साफ कर दिया कि इस बिल को आज नहींं लिया जाएगा। संसद के मॉनसून सत्र का आज आखिरी दिन है, ऐसे में सरकार द्वारा इसी सत्र में तीन तलाक बिल को पास कराने की मंशा अधूरी रह गई।

सोनिया गांधी ने कहा, तीन तलाक पर कांग्रेस का रुख स्पष्ट

इससे पहले UPA की चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने कहा कि तीन तलाक बिल पर कांग्रेस का रुख एकदम स्पष्ट है। कांग्रेस एवं कुछ अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों ने राफेल विमान सौदे में कथित अनियमितता को लेकर केंद्र सरकार से जवाब देने की मांग करते हुए संसद परिसर में सोनिया गांधी के नेतृत्व में प्रदर्शन किया। पार्टी के सदस्यों ने इस मामले में संयुक्त संसदीय समिति के गठन की भी मांग की। कांग्रेस सदस्यों ने लोकसभा में यह मुद्दा उठाते हुए आसन के समीप आकर नारेबाजी की। इस मुद्दे पर शून्यकाल के दौरान कांग्रेस सदस्यों ने सदन से वॉकआउट भी किया।

राफेल सौदे पर राज्यसभा में भी हंगामा

इससे पहले राफेल विमान सौदे की संयुक्त संसदीय समिति (JPC) से जांच कराने की मांग कर रहे कांग्रेस सदस्यों के हंगामे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही एक के बाद एक दोपहर 2.30 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। सुबह सदन की बैठक शुरू होते ही कांग्रेस सदस्यों ने इस मुद्दे पर हंगामा शुरू कर दिया। उपसभापति हरिवंश ने सुबह के सत्र का संचालन किया और उनके आसन संभालने पर सदस्यों ने उनका स्वागत किया।

उपसभापति ने हंगामा कर रहे सदस्यों से अपील की कि वे सदन में शून्यकाल चलने दें। विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने आरोप लगाया कि राफेल सौदा एक बड़ा घोटाला है और उन्होंने इसकी जेपीसी से जांच कराने की मांग की। कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा कि कहा कि उन्होंने नियम 267 के तहत एक नोटिस दिया है। इस पर उपसभापति ने कहा कि सभापति ने उनके नोटिस को स्वीकार नहीं किया है।

शून्यकाल में ही तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन ने व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए कहा कि शुक्रवार को भोजनावकाश के बाद गैरसरकारी कामकाज होता है और उस अवधि में विधायी कार्य नहीं हो सकते हैं। इस पर संसदीय कार्य राज्य मंत्री विजय गोयल ने कहा कि कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) की बैठक में यह सहमति बनी थी कि शुक्रवार को विधायी कार्य किए जाएंगे क्योंकि DMK नेता करुणानिधि के सम्मान में सदन की बैठक दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई थी। हालांकि डेरेक और आनंद शर्मा ने कहा कि बीएसी में ऐसी कोई सहमति नहीं बनी थी। गोयल ने आरोप लगाया कि विपक्ष नहीं चाहता कि तीन तलाक विधेयक को पारित किया जाए।

मूल विधेयक में किए गए तीन संशोधन

आपको बता दें कि मूल विधेयक को लोकसभा द्वारा पहले ही मंजूरी दी जा चुकी है और यह राज्यसभा में लंबित है, जहां बीजेपी की अगुआई वाले NDA के पास बहुमत नहीं है। इस बीच केंद्रीय कैबिनेट ने ‘मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक 2017’ में तीन संशोधनों को मंजूरी दे दी है।

सरकार ने गुरुवार को मुस्लिम समुदाय में तीन तलाक से जुड़े प्रस्तावित कानून में आरोपी को सुनवाई से पहले जमानत देने जैसे कुछ प्रावधानों को मंजूरी दी थी। दरअसल, इस कदम के जरिए कैबिनेट ने उन चिंताओं को दूर करने का प्रयास किया है जिसमें तीन तलाक की परंपरा को अवैध घोषित करने तथा पति को तीन साल तक की सजा देनेवाले प्रस्तावित कानून के दुरुपयोग की बात कही जा रही थी।

समझिए कौन से हुए बदलाव

प्रस्तावित कानून ‘गैरजमानती’ बना रहेगा लेकिन आरोपी जमानत मांगने के लिए सुनवाई से पहले भी मैजिस्ट्रेट से गुहार लगा सकता है। गैरजमानती कानून के तहत, जमानत पुलिस द्वारा थाने में ही नहीं दी जा सकती है। कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि प्रावधान इसलिए जोड़ा गया है ताकि मैजिस्ट्रेट ‘पत्नी को सुनने के बाद’ जमानत दे सकें।

उन्होंने स्पष्ट किया, ‘हालांकि प्रस्तावित कानून में तीन तलाक का अपराध गैरजमानती बना रहेगा।’ सूत्रों का कहना है कि मैजिस्ट्रेट यह सुनिश्चित करेंगे कि जमानत तभी दी जाए जब पति विधेयक के अनुसार पत्नी को मुआवजा देने पर सहमत हो। विधेयक के अनुसार मुआवजे की राशि मैजिस्ट्रेट द्वारा तय की जाएगी।

पीड़ित या करीबी की शिकायत पर ही प्राथमिकी

एक अन्य संशोधन यह स्पष्ट करता है कि पुलिस केवल तब प्राथमिकी दर्ज करेगी जब पीड़ित पत्नी, उसके किसी संबंधी या शादी के बाद रिश्तेदार बने किसी व्यक्ति द्वारा पुलिस से गुहार लगाई जाती है। केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘यह उन चिंताओं को दूर करेगा कि कोई पड़ोसी भी प्राथमिकी दर्ज करा सकता है जैसा कि किसी संज्ञेय अपराध के मामले में होता है। यह दुरुपयोग पर लगाम कसेगा।’

विवाद सुलझा सकते हैं मैजिस्ट्रेट

तीसरा संशोधन तीन तलाक के अपराध को ‘समझौते के योग्य’ बनाता है। अब मैजिस्ट्रेट पति और पत्नी के बीच विवाद सुलझाने के लिए अपनी शक्तियों का इस्तेमाल कर सकते हैं। समझौते के योग्य अपराध में दोनों पक्षों के पास मामले को वापस लेने की आजादी होती है।