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तीन तलाक बिल पर लोकसभा में बहस

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तीन तलाक बिल पर लोकसभा में बहस चल रही है। लोकसभा स्पीकर ने सरकार और विपक्ष को इस बिल के संबंध में बहस के लिए 4 घंटे का वक्त दिया है। विपक्ष का कहना है कि इस विधेयक से तीन तलाक को दंडनीय अपराध के दायरे से हटाना चाहिए, जबकि सरकार ने इसे मुस्लिम महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए अहम करार दिया है।

20 इस्लामिक देशों से हटा, भारत में क्यों नहीं: रविशंकर

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने डिबेट के दौरान कहा कि तीन तलाक लेने वाले मुस्लिम पुरुषों के लिए सजा का प्रावधान करने वाला यह विधेयक राजनीति नहीं है बल्कि महिलाओं को न्याय दिलाने वाला और उन्हें सशक्त करने वाला है। बिल को राजनीतिक दृष्टि से नहीं देखना चाहिए, यह मानवता और न्याय के लिए है। उन्होंने कहा, ’20 इस्लामिक देश इस पर प्रतिबंध लगा चुके हैं। फिर भारत जैसे सेकुलर देश में ऐसा क्यों नहीं हो सकता? मेरा आग्रह है कि आप लोग इस संदेवनशील मसले को राजनीतिक चश्मे से न देखें।’

कांग्रेस और ओवैसी बोले, सेलेक्ट कमिटी पर जाए बिल

इस बिल के कई प्रावधान असंवैधानिक हैं। इस बिल को दोनों सदनों की संयुक्त सेलेक्ट कमिटी को रेफर किया जाना चाहिए ताकि इसकी स्क्रूटनी की जानी चाहिए। एआईएडीएमके लीडर पी. वेणुगोपाल, टीएमसी के सुदीप बंदोपाध्याय, एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी और एनसीपी की सुप्रिया सुले ने भी ऐसी ही मांग रखी।

क्या बोलीं स्पीकर सुमित्रा महाजन

ऐसा ही एक विधेयक लोकसभा में चर्चा के बाद पारित हो चुका है। हालांकि सदस्य चर्चा के दौरान मुद्दे को उठा सकते हैं। अचानक इस तरह की मांग नहीं उठाई जा सकती है कि बिल को सेलेक्ट कमिटी के पास भेजा जाए।

कांग्रेस सांसद बोलीं, महिलाओं को सिर्फ मुकदमेबाजी मिलेगी

कांग्रेस की सांसद सुष्मिता देव ने कहा कि सशक्तिकरण के नाम पर सरकार महिलाओं को सिर्फ मुकदमेबाजी का झंझट दे रही है। इस बिल का उद्देश्य मुस्लिम महिलाओं को सशक्त करने से ज्यादा मुस्लिम पुरुषों को दंडित करना है।

लेखी का सवाल, कुरान के किस सूरा में तीन तलाक का जिक्र

बीजेपी सांसद मीनाक्षी लेखी ने कहा कि तीन तलाक का विरोध करने वाले लोगों से मैं यह पूछना चाहती हूं कि कुरान के किस सूरा में तलाक-ए-बिद्दत का जिक्र किया गया है। यह महिला बनाम पुरुष का मसला नहीं है, यह पूरी तरह से मानवाधिकार के उल्लंघन से जुड़ा मामला है।

तीन तलाक को दंडनीय अपराध ठहराने वाले विधेयक को 17 दिसंबर को लोकसभा में पेश किया गया था। यदि इस विधेयक को मंजूरी मिलती है तो यह सितंबर में लागू किए गए अध्यादेश की जगह लेगा। प्रस्तावित कानून के मुताबिक तीन तलाक लेना अवैध होगा और ऐसा करने का दोषी पाए जाने पर पति को तीन साल तक की जेल की सजा होगी।