Home National Uttarakhand तीन तलाक की सभ्य समाज में कोई जगह नहींः सीएम त्रिवेंद्र रावत

तीन तलाक की सभ्य समाज में कोई जगह नहींः सीएम त्रिवेंद्र रावत

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तीन तलाक मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि आज के दौर में सभ्य समाज में इस तरह की प्रथाओं की कोई जगह नहीं है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया।

सीएम ने ट्वीट किया कि यह मुस्लिम बहनों के अधिकारों व सम्मान की लड़ाई थी। इस फैसले से उन्हें हक मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि सभ्य समाज में इस तरह की प्रथाओं को कोई जगह नहीं है।

मुख्यमंत्री ने यह भी ट्वीट किया कि इस मुद्दे पर उत्तराखंड में काशीपुर की सहारा बानों की पहल कारगार साबित हुई। उन्होंने एक महिला समाज के लिए बड़ी जीत हासिल की। इसके लिए वह बधाई की पात्र हैं।

वित्त मंत्री प्रकाश पंत ने भी सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि तीन तलाक मसले से निजात दिलाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाल किले से दिलाए गए विश्वास की यह जीत है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत

भारतीय जनता युवा मोर्चा के मंथन कार्यक्रम में पहुंचे भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने कहा कि दुनिया की महिलाओं को एक जैसा अधिकार मिलना चाहिए। इस मामले में किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए। तीन तलाक पर पर सुप्रिम कोर्ट के आदेश का हम जी भरकर स्वागत करते हैं।

मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से छुटकारा मिलेगाः बाबा रामदेव

सुप्रीम कोर्ट के तीन तलाक पर फैसले का स्वागत करते हुए योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला है, जिससे मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से छुटकारा मिलेगा और तीन हक सम्मान समानता और समाज में शिक्षा एवं स्वतंत्रता के लिए उनकी यात्रा यात्रा शुरू होगी। उम्मीद है कि इसके बाद नए भारत के निर्माण में नई भूमिका के साथ वह भी अहम रोल अदा कर सकेंगी। मेरी शुभकामनाएं हमेशा उनके साथ है।

सुप्रीम कोर्ट के तीन तलाक के फैसले पर गायत्री तीर्थ शांतिकुंज प्रमुख डॉक्टर प्रणव पंड्या ने इसे बेहतर और ऐतिहासिक फैसला बताया है। उन्होंने उम्मीद जाहिर की है कि इससे मुस्लिम महिलाओं की स्थिति उनके सम्मान समाज में उनकी समानता और समाज निर्माण में उनकी स्वतंत्रता में वृद्धि होगी।

उन्होंने आशा व्यक्त की है कि संसद इस मामले में जल्द उचित कदम उठाते हुए फैसला लेगी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को मुस्लिम महिलाओं के हक की लड़ाई के प्रति ऐतिहासिक बताया।

 

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