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हमारी फिल्म ने यह मान्यता तोड़ी

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करीना कपूर खान, सोनम कपूर आहूजा, स्वरा भास्कर और शिखा तलसानिया स्टारर ‘वीरे दी वेडिंग’, ‘पद्मावत’ के बाद इस साल की दूसरी सबसे चर्चित फिल्म बन चुकी है। इस फिल्म के रिलीज होने से पहले जहां इसमें लड़कियों के गाली-गलौज करने, शराब पीने, सेक्स की बातें करने को लेकर विवाद हो रहा था, वहीं फिल्म रिलीज होने के बाद हर तरफ सिर्फ एक ही सीन की चर्चा है और वह है स्वरा भास्कर का मास्टरबेशन सीन।

हालांकि, फिल्म को पसंद करने वालों की भी कमी नहीं है, जिसके चलते यह बॉक्स ऑफिस पर करीब 65 करोड़ का दमदार बिजनस कर चुकी है। ऐसे में हमने स्वरा से फिल्म की सक्सेस, उनके चर्चित सीन और लोगों की प्रतिक्रिया पर खास बातचीत की:

आपको इस रोल के लिए सबसे बड़ा कॉम्पलिमेंट क्या मिला?

मुझे तारीफ तो बहुत सी मिली, लेकिन हिमांशु (स्वरा के बॉयफ्रेंड और फिल्म राइटर हिमांशु शर्मा) ने एक बात बोली, जो मुझे बहुत अच्छी लगी कि तुमने जिस तरह से वह कैरक्टर किया है, वह लड़की बुरी नहीं लग रही। वह अमीर है, बिगड़ैल है, लेकिन उसमें कुछ प्यारा सा है, जिससे उसकी कोई हरकत बुरी नहीं लगी।

यह मेरे लिए बहुत बड़ी बात थी, क्योंकि मेरी कोशिश यही थी। मैं चाहती थी कि साक्षी भले ही अमीर बाप की बिगड़ी हुई औलाद है, लेकिन आपको वह पसंद आनी चाहिए। इसके अलावा, किसी ने मुझसे कहा कि यह अर्बन और मॉडर्न अनारकली है। यह भी मुझे बहुत अच्छा लगा।

‘वीरे दी वेडिंग’ की इस सक्सेस को आप कैसे देखती हैं?

मैं इस सफलता को बहुत खुशी और आभार के साथ देखती हूं। साथ ही एक उम्मीद के साथ भी देखती हूं। पहली बार बॉलिवुड में एक ऐसी फिल्म, जो महिला केंद्रित थी, जिसकी बागडोर चार हिरोइनों के हाथों में थी, जिसे महिला प्रड्यूसर्स बना रही थीं। उसने 10.75 करोड़ की ओपनिंग की, यह कोई छोटी बात नहीं है, यह सफलता बहुत बड़ी है।

हमारी इंडस्ट्री में माना जाता है कि महिला केंद्रित फिल्में पैसे नहीं बनाती हैं, लेकिन हमारी फिल्म ने यह मान्यता तोड़ी है। देखा जाए तो ये जो सौ करोड़ का क्लब है, वह मर्दों का क्लब है। उसमें ज्यादातर पुरुष प्रधान फिल्में हैं। ऐसे में, अभी ‘राजी’ शामिल हुई है। फिर, उसमें ‘वीरे दी वेडिंग’ भी शामिल हो जाती है तो वह सौ करोड़ क्लब सही मायने में लड़कियों का भी हो सकता है।

मुझे लगता है कि इस सफलता के बहुत से मायने हैं। आप ये भी देखें कि इस फिल्म में चार हिरोइनें हैं। सब 30 या 30 के ऊपर की हैं। एक मां है। एक शादीशुदा है। एक ऐक्टिविस्ट टाइप है। एक नई है, जिसका बॉडी टाइप टिपिकल हिरोइन जैसा नहीं है। इन चार लड़कियों की फिल्म इतनी सक्सेसफुल हो रही है, पैसा बना रही है तो ये मेरे लिए उम्मीद है। यह एक नई दिशा देती है, खासकर ऐक्ट्रेसेज के लिए, उनके करियर के लिए, उनकी फिल्मों के लिए।

आप इस फिल्म पर इतनी ज्यादा चर्चा या बहस की क्या वजह मानती हैं?

ये चर्चा इसलिए है क्योंकि आप पहली बार एक ऐसी फिल्म देख रहे हैं, जो आपने बॉलिवुड में पहले देखी नहीं है। आपने ऐसी फिल्म देखी नहीं है, जहां करीना और सोनम जैसी लड़कियां खुलेआम गालियां दे रही हैं। एक ऐसी फिल्म, जहां हिरोइन शादी के लिए तैयार नहीं हैं।

आपने फिल्मों में हमेशा ऐसी मां देखी है, जो आंखों में आंसू लेकर बच्चे को खाना खिला रही है। आपने एक ऐसी मां नहीं देखी, जो पति को बच्चा देकर कहती है कि मैं थक गई हूं भाई, अब तेरी बारी है। अब तू संभाल, मैं जा रही हूं पार्टी करने और निश्चित तौर पर आपने कभी मास्टरबेशन का ऐसा सीन कभी नहीं देखा।

आपके उस सीन ने हंगामा मचा रखा है। लोगों के इस रिऐक्शन को कैसे देखती हैं?
मुझे पता था कि शॉक वैल्यू तो होगी ही। मैं लोगों को इसके लिए दोष नहीं देती हूं। यह नैचरल है, क्योंकि लोगों ने कभी ऐसा देखा नहीं है। मुझे लगता है कि चलो, इसी बहाने कम से कम इस पर बात तो हो रही है।

हालांकि, बहुत से लोगों को वह पसंद भी आ रहा है। हमने एक-दो थिअटर विजिट किए थे। उसमें जो ऑन्टियां थीं, हमने उनसे खास तौर पर पूछा कि फिल्म कैसी लगी, तो सबने कहा कि बहुत अच्छी लगी। उस सीन के बारे में खास तौर पर पूछा, तो कहा- हां, तो क्या हुआ/ फनी था। हां, ट्रोल करने वालों को एक नया मौका मिल गया मुझे ट्रोल करने का।

आपके मन में वह सीन करने को लेकर किसी तरह की हिचक थी?

हिचक नहीं थी। मैं बस यह चाहती थी कि वह सीन कॉमिडी की तरफ जाए। पॉर्न की तरफ न जाए, क्योंकि जैसा मैंने कहा कि मुझे पता था कि वह लोगों को थोड़ा शॉकिंग लगेगा। मुझे पता था कि शॉक वाला रिऐक्शन तो आएगा। इसीलिए, मैं चाहती थी कि वह थोड़ा कॉमिक लगे।

फिर, ऐसे सीन करते वक्त अपनी टीम पर विश्वास बहुत जरूरी होता है, तो मुझे शशांक ( निर्देशक शशांक खेतान) पर भरोसा था। मुझे रिया (प्रड्यूसर रिया कपूर) पर भरोसा था। स्क्रिप्ट मैंने पढ़ी ही थी, तो मुझे पता था कि वह सीन है और ऐसा है, तो मुझे कोई दिक्कत नहीं थी।

लेकिन फिल्म में साक्षी खुद इस बात को लेकर अपराधबोध से ग्रस्त होती है। क्या कहना चाहेंगी?

देखिए, मुझे यह बात अच्छी लगी। मतलब, टेक्निकली मैंने कुछ गलत नहीं किया है, लेकिन शरम तो आती है न, क्योंकि हम लड़कियों को तो यही बताया जाता है कि लड़के कुछ भी करें, कहीं भी करें, लेकिन आप अपने बेडरूम में, अपनी प्राइवेसी में भी ऐसा करो तो आपको शर्मिंदा होना चाहिए कि आप अपने को खुश कर रही थीं।

औरतें जब भी अपनी इच्छाओं, खासकर यौन इच्छाओं के बारे में सोचती हैं, तो उसके साथ अपराधबोध जोड़ दिया जाता है। औरतों की ऐसी इच्छाओं के साथ अपराधबोध हमारी संस्कृति में ही डाल दिया गया है। अगर आपको समाज की मानसिकता देखनी है, तो मेरी टाइमलाइन पर आकर देखिए।