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भारत का स्विट्जरलैंड है कौसानी

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उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में 6075 फुट से ज्यादा की ऊंचाई पर बसा है खूबसूरत हिल स्टेशन कौसानी। दिलकश नज़ारों के चलते ही इस जगह को भारत का स्विट्जरलैंड कहा जाता है। कहीं-कहीं इसे कुमाऊं का स्वर्ग भी कहते हैं। कौसानी पहुंचकर आपको हिमालय की चोटियों का 350 किलोमीटर फैला नज़ारा एक ही जगह से देखने का मौका मिलता है।

कुमाऊं का स्वर्ग भी कहते हैं

पहाड़ों से नीचे झांके तो कटौरी घाटी और गोमती नदी मन मोह लेती है। कौसानी पिंगनाथ चोटी पर बसा है। यहीं से नंदा देवी पर्वत की चोटी को करीब से देखा जा सकता है। इन खूबसूरत नजारों से रूबरू होने के लिए ही देश-दुनिया से टूरिस्ट कौसानी खिंचे चले आते हैं। रुद्रधारी फॉल्स, लक्ष्मी आश्रम, गांधी आश्रम और टी एस्टेट यहां के फेवरिट टूरिस्ट पॉइंट्स हैं।

कैसे पहुंचे

– दिल्ली से कौसानी सड़क मार्ग से जुड़ा है और इसकी दूरी करीब 410 किलोमीटर है।
– दिल्ली से कौसानी पहुंचने में करीब 9-10 घंटे का वक्त लगता है।
– नैनीताल कौसानी 120 किलोमीटर दूर है, जबकि अल्मोड़ा से इसकी दूरी सिर्फ 50 किलोमीटर है।
– कौसानी का नजदीकी एयरपोर्ट पंत नगर है। हालांकि एयरपोर्ट भी करीब 180 किलोमीटर दूर है।
– नजदीकी रेलवे स्टेशन काठगोदाम है, जहां से अल्मोड़ा होकर कौसानी की दूरी 140 किलोमीटर के आसपास है।
– मार्च से जून के बीच कौसानी घूमने-फिरने का बेस्ट सीजन है। फिर सितंबर से नवंबर का समय भी अच्छा है।

रुद्रधारी फॉल्स: शिव और विष्णु का था वास

सीढ़ीदार पहाड़ी धान के खेतों और हरे-भरे ऊंचे-ऊंचे देवदार के घने जंगलों के बीचों बीच रुद्रधारी फॉल्स कमाल की खूबसूरती संजोए है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक यह आदि कैलाश है। यहीं भगवान शिव और विष्णु का वास था। यहां आने-जाने का रास्ता कठिन नहीं है। कौसानी के पास 12 किलोमीटर ट्रेकिंग करते-करते भी यहां पहुंच सकते हैं। ठंडे पानी का झरना काफी ऊंचाई से गिरता है। झरने के साथ प्राचीन गुफा और सोमेश्वर मन्दिर भक्तों की श्रद्धा का केंद्र है।

यहां गांधीजी ने लिखी थी किताब

कौसानी के आश्रम भी चर्चा में हैं। अनासक्ति आश्रम को ही गांधी आश्रम के नाम से जानते हैं। बताया जाता है कि 1929 के आसपास महात्मा गांधी आश्रम में दो हफ्ते रहे थे। इसी दौरान, उन्होंने ‘अनासक्ति योग’ पर एक किताब लिखी थी। आश्रम के एक हिस्से में म्यूजियम भी है। यहां पुरानी तस्वीरें और चरखा समेत तमाम यादगार वस्तुएं हैं। महात्मा गांधी के बारे में और भी कई जानकारियां संग्रहित हैं।

सुमित्रा नंदन पंत की जन्मस्थली

कौसानी का एक और अट्रैक्शन सुमित्रा नंदन पंत का म्यूजियम है। असल में, कौसानी हिन्दी के जाने-माने कवि सुमित्रा नंदन पंत की जन्मस्थली है। जहां आज म्यूजियम है, वहां पंत जी का बचपन गुजरा था। टूरिस्ट्स को पंत जी की रचनात्मक यात्रा से रू-ब-रू होने का मौका मिलता है। उनकी हिन्दी और अंग्रेजी की अनेक किताबें यहां सजी हैं। उनकी कई कविताओं की पांडुलिपियां भी सहेज कर रखी गईं हैं।

टी एस्टेट के जलवे

uknews-uttarakhand kausaniकौसानी का जलवा देखना चाहें, तो टी एस्टेट जरूर जाएं। यहां लोग खुद को कुदरत के एकदम करीब महसूस करते हैं। चाय के बागान करीब 210 हेक्टेयर एरिया में फैले हैं। चाय पीने के शौकीनों के लिए तो कमाल की जगह है। यहां किस्म-किस्म की चाय पत्तियां उगाई जाती हैं।

यहां की बेस्ट चाय पत्ती ‘गिरियास टी’ की खेती भी यहां होती है। इसके अलावा ऑर्गैनिक टी भी मिलती है। कुछ एक चाय पत्तियां तो अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी और कोरिया तक एक्सपोर्ट की जाती हैं। खैर, कौसानी घूमने जाएं तो ठेठ कौसानी चाय जरूर पिएं और पहाड़ों की सौगात के तौर पर चाय पत्ती अपने साथ घर भी ले जाएं।

आलू गुटका जरूर खाएं

चाय के साथ ’आलू गुटका’ खूब खाया जाता है। उबले आलू को नमक-मिर्च का तड़का लगा कर बनाते हैं। चाय के साथ यही स्नैक सबसे ज्यादा खाया जाता है। कौसानी और आसपास के पहाड़ी शहरों की बाल मिठाई भी वर्ल्ड फेमस है। खालिस दूध को घंटों काढ़-काढ़ कर बनाते हैं। चॉकलेट फ्लेवर के ऊपर सफेद मीठी चीनी के दाने लगे होते हैं। लोकल लोग ही नहीं, टूरिस्ट्स भी बाल मिठाई खूब खाते हैं और पैक करवाकर घर भी ले जाते हैं।