Home Uttarakhand Kumaun आठ घंटे लपटों में घिरा रहा सिमोली गांव

आठ घंटे लपटों में घिरा रहा सिमोली गांव

एक पॉलीहाउस व घास के 13 स्टॉक खाक

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आठ घंटे लपटों में घिरा रहा सिमोली गांव

ताड़ीखेत (रानीखेत) : तमाम बंदोबस्त व फोर डेस्क गठित करने के बावजूद पर्वतीय क्षेत्र में आग पर काबू पाना बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। चिंताजनक पहलू यह कि जंगलों में सुलग रही चिंगारी गांवों को भी झुलसाने लगी है। तहसील क्षेत्र के सुदूर ऊणी व कुरिया मटेला के जंगल से उठी लपटें सिमोली गाव की आबादी तक पहुंच गई।

इससे पूरा गांव चारों से आग में घिर गया। तेज हवा मददगार बनी तो पलक झपकते ही एक पॉलीहाउस व घास के 13 स्टॉक खाक हो गए। इसके अलावा एक मकान आग की चपेट में आ गया और उसका एक हिस्सा भराभरा कर ढह गया। बेबस ग्रामीणों को आग पर काबू पाने में करीब आठ घंटे लगे।

विकासखंड के सुदूर सिमोली गाव में शनिवार को दिन भर अफरा-तफरी रही। ग्रामीणों के अनुसार तलहटी की ओर ऊणी व कुरिया मटेला के जंगल में शनिवार सुबह करीब आठ बजे आग लगी। हवा का रुख ऊपरी हिस्से की ओर होने के कारण आग की लपटें कुछ ही मिनट में आबादी तक पहुंच गई।

इससे पहले कि ग्रामीण कुछ समझ पाते बीपीएल परिवार के दीप चंद्र पांडे का हालिया तैयार पॉलीहाउस जल उठा। सिंचाई को बिछाई पाइप लाइन भी तबाह हो गई। इससे हजारों की क्षति हुई है। पास ही घास के छह लुट्ठे धू-धू कर जल उठे। लपटों ने कवित दत्त पांडे के पांच तथा ज्वाला दत्त व जीवन राम के एक-एक घास के लुट्ठों को स्वाहा कर दिया।

महिलाओं व पुरुषों ने बाल्टियों से पानी फेंक आग पर काबू पाने की कोशिश की। मगर विकराल हो चुकी लपटों ने गांव के ऊपरी हिस्से में जनार्दन पांडे का बंद पड़ा दोमंजिला मकान आगोश में ले लिया। घंटों तक लपटों से घिरे भवन का एक हिस्सा ध्वस्त हो गया। शाम को करीब चार बजे शिखर तक पहुंची आग खुद ब खुद शांत तो हो गई लेकिन लपटें गैरण के जंगल की ओर फैलती चली गई। राजस्व कर्मियों ने मुआयना किया।

फिर उसी गरीब पर आफत

सिमोली गांव के दीप चंद्र पांडे बीते वर्ष अग्निकांड में हुई क्षति से उबर भी न पाए थे कि अब अब जंगल की लपटों में अरमान खाक हो गए। 10 अक्टूबर 2016 को शॉट सर्किट से दीप चंद्र का दोमंजिला मकान अग्निकांड की भेंट चढ़ गया था। मुआवजे के नाम पर दीप चंद्र को धेला तक नहीं मिला। इधर 1.20 लाख का लोन लेकर दीप चंद्र ने पॉली हाउस लगा आजीविका का जरिया ढूंढने का प्रयास किया तो शनिवार को भीषण लपटों ने उसे भी जला डाला।

नहीं पहुंच सकती फायर ब्रिगेड

सिमोली-पथुली मोटर मार्ग का सर्वे तो हो चुका लेकिन निर्माण वर्षो से अधर में है। बीते वर्ष भीषण अग्निकांड पर काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड गांव के करीब मोड़ तक पहुंची भी लेकिन वाहन के लिए मार्ग नहीं होने से कोशिश बेकार गई। शनिवार को लपटें विकराल हुई तो यही मजबूरी खूब अखरी।

मुआवजे की मांग उठाई

अग्निकांड में दीप चंद्र पांडे के पॉलीहाउस को पहुंची क्षति तथा ग्रामीणों के खाक हुए घास के स्टॉक का ग्रामीणों ने मुआवजा देने की मांग उठाई है। राजेश पांडे, देवेंद्र पांडे, कला देवी, गीता पांडे, ममता पांडे आदि ने कहा कि आर्थिक तंगी से जूझ रहे दीप चंद्र को बीते वर्ष हुए अग्निकांड का भी मुआवजा नहीं मिला।

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