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उत्तराखंड का राजस्व घटा

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देहरादून: जीएसटी लागू होने से पहले राज्य सरकार उत्तराखंड को उपभोक्ता राज्य बताकर राजस्व में बढ़ोतरी की बात कर रही थी, जबकि जीएसटी के बाद राज्य की छवि निर्माता राज्य के रूप में अधिक प्रभावशाली होने से राज्य के हिस्से का राजस्व घट गया है।

छह माह में ही राजस्व में 1008 करोड़ रुपये की कमी

जुलाई से दिसंबर माह तक के राजस्व पर नजर डालें तो राज्य के हिस्से वाले एसजीएसटी (स्टेट जीएसटी) में 1707 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। वहीं, पिछले साल इन छह माह में वैट में प्रदेश को 2715 करोड़ रुपये का राजस्व मिला था। इस तरह शुरुआती छह माह में ही राजस्व में 1008 करोड़ रुपये की कमी आ गई है।

दूसरी तरफ जुलाई से दिसंबर माह तक राज्य से कुल 08 हजार 524 करोड़ रुपये का राजस्व पैदा हुआ है। हालांकि इसमें सबसे अधिक 05 हजार 845 करोड़ रुपये हिस्सा उस आइजीएसटी (इंटीग्रेटेड जीएसटी) का है, जिसका 50 फीसद भाग तो केंद्र के खाते में जाएगा और 50 फीसद हिस्सा उस राज्य को मिलेगा, जिस राज्य में उत्तराखंड के माल की खपत हुई है।

इसका सीधा मतलब यह हुआ कि अन्य राज्य से उत्तराखंड में माल की खपत की तुलना में यहां के माल की सप्लाई दूसरे राज्यों में अधिक हो रही है। क्योंकि पिछले साल वैट समेत सेंट्रल एक्साइज व सर्विस टैक्स के राजस्व को भी मिला लें, तब भी इस बार का कुल राजस्व दोगुने से भी अधिक है।

इस तरह घटा उत्तराखंड का राजस्व

(करोड़ रुपये में)

माह वैट एसजीएसटी

जुलाई 506 285

अगस्त 406 308

सितंबर 414 279

अक्तूबर 464 307

नवंबर 495 264

दिसंबर 430 264

कुल 2715 1707

कुल राजस्व ऐसे बढ़ा (करोड़ रुपये में)

माह, पूर्व जीएसटी, जीएसटी बाद

जुलाई, 711, 981

अगस्त, 615, 857

सितंबर, 683, 1003

अक्तूबर, 698, 540

नवंबर, 693, 493

दिसंबर, 663, 587

कुल, 4063, 4461

राज्य कर आयुक्त सौजन्या ने बताया कि इसमें कोई शक नहीं है कि राज्य के हिस्से के राजस्व में कमी दर्ज की गई है। हालांकि जीएसटी में राज्य को पांच साल तक राजस्व की क्षतिपूर्ति भी प्राप्त होगी। राज्य में राजस्व के स्रोत बढ़ाने के लिए वित्त विभाग को प्रयास करने होंगे।

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