Home National Uttarakhand चैनल सीईओं उमेश शर्मा के खिलाफ आयुष गौड ने मोर्चा खोला

चैनल सीईओं उमेश शर्मा के खिलाफ आयुष गौड ने मोर्चा खोला

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देहरादून। संवाददाता। समाचार प्लस न्यूज चैनल के सीईओं उमेश शर्मा को पुलिस ने सोमवार को दून जिला कोर्ट में पेश करने के बाद न्ययायिक हिरासत में दस दिन के लिए जेल भेज दिया गया है। उमेश के खिलाफ राजपुर थाने में मुकदमा दर्ज कराने वाले आयुष गौड़ ने पत्रकारों से बात करते हुए मामलें से जुड़े हर सवाल का जवाब दिया। उन्होंने बताया कि अभी संस्थान से इस्तीफ नहीं दिया है। संस्थान का मालिक बुरा होने से वहां के लोग और संस्थान बुरा नहीं हो जाता है। उन्होंने उमेश के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाने की वजह स्टिंग का गलत इस्तेमाल और ब्लैकमेलिंग करना बताया।

सोमवार को प्रेस क्ल्ब में मीडिया से रूबरू होते हुए समाचार प्लस के एडिटर इनवेस्टीगेटर आयुष गौड ने बताया कि उनके संस्थान के सीईओं ने उन्हें इसी साल जनवरी में स्टींग आॅपरेशन करने की जिम्मेंदारी सौंपी थी। जिसके तहत उनसे कहा गया था कि उन्हें उत्तराखण्ड के कुछ आईएएस और राजनेताओं सहित मुख्यमंत्री का स्टिंग करना है। आयुष को लगा कि संस्थान उनसे आॅफिसियली ये काम करवा रहा है। जिससें उनकी और चैनल की तरक्की होगी। मगर आयुष जब आयुष से कोई स्टिंग करवाया जाता था, तो उसके तुरंत बाद उसकी रिकार्डिंग राहुल भाटिया को देनी होती थी। भाटिया ने ही उत्तराखण्ड में स्टिंग के लिए सचिव मृत्युंज्य कुमार मिश्रा से आयुष गौड की मुलाकात कराई थी। साथ ही ये भी कहा गया कि समय-समय पर इन्हें भी स्टिंग कैमरे में ले लेना। वक्त पड़ने इन्हें भी ब्लैकमेल किया जा सकता है।

बिजनेस मैन के तौर पर भेजा आयुष गौड को देहरादून

प्रशासन और शासन के लोगों का स्टिंग करने के लिए जब आयुष गौड को देहरादून भेजा, तो राहुल भाटिया के जरिये संजय गुप्ता, काशिम, सचिव मृत्युंज्य मिश्रा, सचिव ओम प्रकाश आदि लोगों से मिलवाया गया। जिससें मुख्यमंत्री तक पहुंचा जा सकें। इस दौरान आयुष से ये कहा गया कि वो खुद को एक बिजनेश मैन बताएं। उमेश शर्मा ने सरकार की कमियों को कैमरे में कैद करने के लिए आयुष को खास तरह का हिडन कैमरा दिया था। जिससें सरकार में अस्थिरता उत्पन्न की जा सकें। मगर जब आयुष मुख्यमंत्री के डिफेंस कालोनी स्थित आवास में गया उसने हिडन कैमरा और गैजेट को बाहर ही रखा दिया। उस दौरान उनके दिल ने मुख्यमंत्री का स्टिंग करने की इजाजत नहीं दी। वह जानता था कि यहां पर स्टिंग करना पोर्टोकाॅल का हनन करना है। अगर फंस गए तो उनका संस्थान और मालिक उन्हें नहीं बचा पायेगा। इसलिए उन्होंने मुख्यमंत्री से साधारण मुलाकता करना ही उचित समझा।

पनाष वैली पर सटीक जवाब नहीं दे सकंे आयुष

मीडिया ने जब आयुष पर सवालों की बौझार की तो उन्होंने वन टू वन सभी के जवाब दिए। मगर जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने प्रतिवादी का पनाष वैली का पता मुकदमा दर्ज करवाते समय कैसे लिखवाया। तो आयुष सटीक जवाब नहीं दे सकें। पत्रकारों का दबाव देख उन्होंने कहा कि उनके कुछ करीबियों के जरिये उन्हें पनाष वैली का एड्रेस पता लगा था। मीडिया ने उनसे उनके करीबी का नाम जानना चाहा तो उन्होंने जवाब में नो कमेंट कहना ही उचित समझा। उन्होंने देहरादून में किसी भी तरह के स्टिंग आॅपरेशन  से मना किया है। बताया कि जो कुछ उन्होंने कहा सब सच है। इसका सबूत पुलिस के पास मौजूद सामाग्री से कुछ दिनों बाद जाहिर हो जाएगा।

उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह का होना था स्टिंग

आयुष गौड़ ने बताया कि उन्हें उमेश कुमार शर्मा ने उच्च शिक्षा मंत्री धन सिह रावत का स्टिंग आॅपरेशन करने को कहा था। इस काम के लिए राहुल भाटिया से सहयोग लेने को कहा गया था। राहुल भाटिया सचिव मृत्युंज्य मिश्र के सहयोग से आयुष को मंत्री धन सिंह से मिलवाते, मगर उन्होंने इस स्टिंग से पहले ही चैनल के मालिक से दस से बीस लाख रूपयें एडवांस मांग कर दी। जिसके बाद धन सिंह का स्टिंग होने से टल गया।

स्टिंग टीम में भाटिया का रहा अहम रोल

स्टिंग करने में भले ही सचिव मृत्युंज्य मिश्र का नाम सामने आ रहा हो, मगर चैनल की ओर से सिर्फ उन्हें इस्तेमाल किया जा रहा था। वहीं आयुष ने ये भी स्पष्ट किया कि किसी भी स्टिंग को करने से पहले सचिव मृत्युंज्य मिश्र खुद दस से बीस लाख रूपयें की मांग करते थे। इसी वजह से चैनल के सीईओं आरोपी उमेश कुमार ने उनका भी खास मामालों में लेन-देन की बातों को रिकार्डिंग करने की बात कही थी। साथ ही बताया कि राहुल भाटिया ही दून के अन्य लोगों से मिलाने वाला शख्स है। जो चैनल के स्टिंग टीम का सदस्य भी है।

इसके अलावा प्रवीण साहनी और सौरभ साहनी जो चैनल के सीईओं के भांजे हैं ये भी स्टिंग टीम में शामिल थे। जो आयुष पर बड़ी रकम वसूल करने वाले स्टिंग का दबाव बनाते थे। इसके अलावा तत्कालीन अपर स्थानिक अयुक्त दिल्ली, मृत्युंज्य मिश्रा भी इस काम में शामिल थे। जो वर्तमान मंे दून में ही कार्यरत हैं। आयुष ने बताया कि जब उन पर स्टिंग करने का दबाव बनाया गया तो उन्होंने उत्तराखण्ड के पुलिस मुख्यालय में जाकर पूरे मामलें का पटाक्षेप कर दिया। जिसके बाद राजपुर पुलिस ने अगस्त महीने में मामलेें को गुप्त रखते हुए मकदमा दर्ज किया।

किसी भी पत्रकार के साथ हो सकता है ऐसा

मीडिया से रूबरू होते हुए आयुष गौड ने बताया कि वह लाॅ का विद्यार्थी रह चुका है। मीडिया की सभी गाईड लाईन को अच्छे से जानता है। बताया कि जब किसी मीडिया कर्मी पर गलत काम करने का दबाव बनाया जाता है। तो अच्छा मीडिया कर्मी इस तनाव को ज्यादा समय तक बर्दास नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि यहां कई मीडिया बंधु मेरे जैसे हालातों से गुजरे हांेगे। वह मेरे दर्द को अच्छे से समझ सकते हैं। ऐसे हालातो मंे आपको किस के पास मदद के लिए जाना होगा। यह निर्णय करना मुश्किल हो जाता है।