Home Uttarakhand Capital Doon सेना या पुलिस की वर्दी सिलने से पहले पुलिस को करना होगा...

सेना या पुलिस की वर्दी सिलने से पहले पुलिस को करना होगा सूचित

66
0
SHARE
uknews-INDIA-POLITICS-DEFENCE

देहरादून: भारतीय सैन्य अकादमी को उड़ाने की धमकी के मद्देनजर पुलिस ने दर्जियों का सत्यापन किया। इस दौरान वहां काम करने वालों के बारे में जानकारी जुटाने के साथ सेना या पुलिस की वर्दी सिलने से पहले उन्हें स्थानीय पुलिस को सूचित करना होगा। पुलिस का मानना है कि आतंकी यहां अपनी पहचान छिपाने के लिए वर्दी का इस्तेमाल कर सकते हैं।

तीन रोज पहले दी गई थी धमकी

दरअसल, तीन रोज पहले आर्मी इंटेलीजेंस को एक फोन आया, जिसमें धमकी दी गई थी कि वह भारतीय सैन्य अकादमी को उड़ा देंगे। हालांकि, अभी तक पुलिस और खुफिया एजेंसियां उस फोन कॉल करने वाली की पहचान तक नहीं कर सकीं हैं। मगर, आइएमए को पूर्व में मिली धमकियों को देखते हुए आतंकी साजिश से इन्कार भी नहीं किया जा सकता।

ऐसे में पुलिस इस सूचना के बाद से अलर्ट मोड पर है। आइएमए के पास रोजाना चेकिंग करने के साथ ही आसपास रहने वालों का सत्यापन भी किया जा रहा है। वहीं शुक्रवार को शहरभर में वर्दी सिलने वाले दर्जियों के यहां पहुंची। उनके यहां काम करने वाले युवकों का सत्यापन करने के साथ उन्हें नोटिस देते हुए हिदायत दी कि किसी भी अनजान व्यक्ति के लिए पुलिस या सेना की वर्दी नहीं सिलेंगे। इसके लिए वह संबंधित व्यक्ति से लिखित अनुमति मांगे।

यदि वह व्यक्ति आनाकानी करता है तो इसकी जानकारी तत्काल निकटवर्ती थाने को दें। ऐसा न करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अभियान के तहत रेसकोर्स में पुलिस लाइन के आसपास से लेकर कैंट के सर्किट हाउस व डाकरा बाजार क्षेत्र के दर्जियों को नोटिस दिए गए। साथ ही उन्हें बताया गया कि अनजान व्यक्ति को वर्दी से जुड़ा सामान भी तभी दें, जब पहचान पत्र संबंधित के पास मौजूद हो। पुलिस ने वर्दी खरीदने एवं सिलवाने वालों का एक रजिस्टर भी तैयार करने का निर्देश सभी दर्जियों को दिया है।

नाभा जेल ब्रेक में इस्तेमाल हुई थी पुलिस की वर्दी

नाभा जेल ब्रेक में आरोपितों ने पंजाब पुलिस की वर्दी का इस्तेमाल किया था। चूंकि आरोपित रायपुर के डांडा लखौंड और अमन विहार में छह महीने से अधिक समय से ठहरे थे, ऐसे में माना जा रहा था कि यह वर्दी आरोपितों ने देहरादून में ही कहीं सिलाई होगी। इस लिहाज से भी अभियान अहम माना जा रहा है। मगर चौंकाने वाली बात यह कि नाभा जेल ब्रेक के डेढ़ साल से अधिक का समय गुजर जाने के बाद पुलिस इसकी याद आई।

एसएसपी निवेदिता कुकरेती का कहना है कि सुरक्षा के लिहाज से यह अभियान चलाया जा रहा है। ताकि सेना या पुलिस की वर्दी का दुरुपयोग न किया जा सके।

LEAVE A REPLY