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पाकिस्तानी फायरिंग में 4 की मौत

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पाकिस्तान ने फिर तोड़ा सीजफायर

जम्मू : रमजान के महीने में भी पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। कुछ दिन पहले बीएसएफ की जवाबी कार्रवाई से सहमे पाक ने गोलाबारी रोकने का अनुरोध किया था पर एक बार फिर उसने दुस्साहस दिखाया है।

जम्मू-कश्मीर के अलग-अलग इलाकों में पाकिस्तान की ओर से की जा रही फायरिंग में बुधवार को 4 लोगों की मौत और 20 लोगों के घायल होने की खबर है। गोलाबारी के कारण दहशत में जी रहे सीमावर्ती गांवों से 40 हजार लोगों को पलायन के लिए मजबूर होना पड़ा है।

पाकिस्तानी सैनिकों द्वारा जम्मू , कठुआ और सांबा जिलों में अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे भारतीय गांवों और सीमा चौकियों पर आज मॉर्टार से गोले दागे गए और जमकर गोलीबारी की गई। पाक गोलाबारी में 8 साल के बच्चे की भी मौत हो गई है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि सांबा में आज सुबह 9 बजे शुरू हुई गोलीबारी में 2 लोगों की मौत हो गई और 6 अन्य घायल हो गए।

मंगलवार रात से ही गोलीबारी जारी

पाकिस्तानी रेंजरों ने कठुआ जिले में आवासीय इलाकों और चौकियों को भी निशाना बनाया। यहां हीरानगर सेक्टर में तड़के भारी गोलीबारी एवं गोलाबारी की गई। पुलिस अधिकारी ने बताया कि सीमा पर रहने वाले लोगों को बुलेट प्रूफ वाहनों के जरिए वहां से निकालने का अभियान जारी है। जम्मू जिले के आरएस पुरा, अरनिया, बिश्नाह और रामगढ़ तथा सांबा सेक्टरों पर मंगलवार रात से ही गोलीबारी जारी है। पाकिस्तान गोलाबारी में आरएस पुरा सेक्टर में एक नागरिक की मौत हो गई।

मंगलवार को पाकिस्तानी सेना की फायरिंग में आठ महीने के बच्चे की जान चली गई थी। इससे पहले सीएम महबूबा मुफ्ती ने एलओसी से सटे इलाकों का दौराकर स्थिति की समीक्षा की थी। जम्मू के कठुआ में हीरानगर सेक्टर में पाकिस्तानी फौज की ओर से भारी शेलिंग की गई। जम्मू के आरएस पुरा में भी पाकिस्तान ने जमकर गोलाबारी की है। यहां घरों और गाड़ियों को गोलाबारी में काफी नुकसान हुआ है।

 

बड़ी संख्या में लोग कर रहे पलायन

पाकिस्तानी रेंजर्स की जम्मू, सांबा और कठुआ जिलों में सैन्य और असैन्य ठिकानों पर लगातार की जारी गोलीबारी और बमबारी के कारण सीमावर्ती गावों से 40,000 से अधिक लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने पर मजबूर होना पड़ा है। पुलिस ने बताया है कि कुछ लोगों ने प्रशासन द्वारा बनाए गए अस्थायी शिविरों में शरण ली है, जबकि अधिकांश लोग अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के घर में शरण लेने के लिए मजबूर हैं।

मवेशियों और घरों की रखवाली के लिए हर घर में एक पुरुष सदस्य को छोड़ दिया गया है। बताया गया है कि बीएसएफ पाकिस्तान के हमले का मुंहतोड़ जवाब दे रही है लेकिन अंतरराष्ट्रीय सीमा के आरएस पुरा, अरनिया, रामगढ़ और अन्य सेक्टरों से भारी संख्या में ग्रामीणों का पलायन जारी है।

पाकिस्तान का नहीं भरोसा

उधर, गैलंट्री पुरस्कार से सम्मानित बीएसएफ कॉन्स्टेबल रामधन गुर्जर ने कहा है कि पाकिस्तान पर भरोसा करने की कोई वजह नहीं है। उन्होंने कहा, ‘वह आपसे दिन में बात करेंगे और सीजफायर कहेंगे लेकिन रात को शेलिंग करेंगे और सिविलियन्स को निशाना बनाएंगे।’

 

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में इस साल अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान की ओर से गोलीबारी की घटनाएं बढ़ी हैं। सीमापार से गोलीबारी की 700 से अधिक घटनाओं में 18 सुरक्षाकर्मियों सहित 40 लोग मारे गए तथा कई घायल हुए हैं।