Home Uttarakhand Capital Doon सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है चारधाम आॅल वेदर रोड

सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है चारधाम आॅल वेदर रोड

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uknews-CM trivendra singh rawat

देहरादून:मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित कैम्प कार्यालय में चारधाम आॅल वेदर रोड तथा टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग की प्रगति की समीक्षा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम आॅल वेदर रोड, राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। इसको निर्धारित अवधि में पूरा करने के लिये सभी संबन्धित विभागों को समन्वय बनाकर काम करना होगा। सभी संबन्धित जिलाधिकारी आॅल वेदर रोड से संबन्धित भू-अधिग्रहण, वन भूमि हस्तांतरण, मुआवजा निर्धारण जैसे कार्यों को शीर्ष प्राथमिकता पर करें।

डेडलाइन के अन्दर काम पूरा करने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने भू-अधिग्रहण, मुआवजा वितरण एवं वन भूमि मामलों के लिये पूर्व निर्धारित 30 सितम्बर की डेडलाइन के अन्दर काम पूरा करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि आरबिट्रेशन के प्रकरणों को समय से निस्तारित किया जाय।

केन्द्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय द्वारा नियुक्त कन्सलटेंट एजेंसियों को अपने पर्याप्त प्रतिनिधि नियुक्त करने के निर्देश दिये गये, जिससे किसी भी स्तर पर देरी न हो। उन्होंने अपर मुख्य सचिव को इस प्रोजेक्ट की साप्ताहिक समीक्षा के निर्देश भी दिये। मुख्यमंत्री ने नेशनल हाइवे अथारिटी के अधिकारियों को निर्देश दिये कि जिलाधिकारियों द्वारा बुलाई जाने वाली मीटिंग में उनका कोई सक्षम प्रतिनिधि अवश्य होना चाहिए।

52 प्रतिशत मामलों को स्वीकृति

बैठक में बताया गया कि वन भूमि हस्तांतरण प्रकरणों में लगभग 52 प्रतिशत मामलों में स्वीकृति मिल चुकी है । राजस्व विभाग द्वारा अभी तक 43 प्रतिशत भू-अधिग्रहण की प्रगति बताई गई, जिसमें सुधार लाने के निर्देश दिये गये।

बताया गया कि ऋषिकेश-रूद्रप्रयाग(140 कि.मी.) हेतु 2089.11 करोड रूपये सिविल वर्क, 56.88 करोड रूपये भू-अधिग्रहण, 20 करोड़ रूपये वन भूमि हस्तांतरण कार्यों को मिलाकर कुल लागत 2165.99 करोड रूपये आगणित है। इसी प्रकार रूद्रप्रयाग-माना(160 कि.मी.) हेतु 1329.37 करोड़ रूपये सिविल वर्क, 162.15 करोड रूपये भू-अधिग्रहण, 50.56 करोड़ रूपये वन भूमि हस्तांतरण कार्यों को मिलाकर कुल लागत 1542.08 करोड़ रूपये आगणित है।

ऋषिकेश-धरासू(144 कि.मी.) हेतु 1320.53 करोड़ रूपये सिविल वर्क, 263.58 करोड रूपये भू-अधिग्रहण, 43.2 करोड़ रूपये वन भूमि हस्तांतरण कार्यों को मिलाकर कुल लागत 1627.31 करोड़ रूपये आगणित है। धरासू-गंगोत्री(124 कि.मी.) हेतु 1979.43 रूपये करोड़ सिविल वर्क, 73.56 करोड रूपये भू-अधिग्रहण, 26 करोड़ रूपये वन भूमि हस्तांतरण कार्यों को मिलाकर कुल लागत 2078.99 करोड़ रूपये आगणित है।

धरासू-यमुनोत्री(95 कि.मी.) हेतु 1797.95 रूपये करोड़ सिविल वर्क, 90.79 करोड रूपये भू-अधिग्रहण, 31.38 करोड़ रूपये वन भूमि हस्तांतरण कार्यों को मिलाकर कुल लागत 1920.12 करोड़ रूपये आगणित है। रूद्रप्रयाग-गौरीकुण्ड(76 कि.मी.) हेतु 1054.088 करोड़ रूपये सिविल वर्क, 26.36 करोड रूपये भू-अधिग्रहण, 25.5 करोड़ रूपये वन भूमि हस्तांतरण कार्यों को मिलाकर कुल लागत 1105.948 करोड़ रूपये आगणित है।

टनकपुर-पिथौरागढ(150 कि.मी.) हेतु 1408.33 करोड़ रूपये सिविल वर्क, 99.82 करोड रूपये भू-अधिग्रहण, 48.72 करोड़ रूपये वन भूमि हस्तांतरण कार्यों को मिलाकर कुल लागत 1556.87 करोड़ रूपये आगणित है। चारधाम आॅल वेदर रोड परियोजना में 10978.81 करोड़ रूपये सिविल वर्क, 773.14 करोड़ रूपये भू-अधिग्रहण, 245.36 करोड़ रूपये वन भूमि हस्तांतरण के कार्यों को मिलाकर 11997.31 करोड़ रूपये की लागत आगणित है।

बैठक में अपर मुख्य सचिव श्री ओमप्रकाश, सचिव राजस्व श्री हरबंश चुघ, जिलाधिकारी चमोली आशीष जोशी, जिलाधिकारी रूद्रप्रयाग श्री मंगेश घिल्डियाल, अपर सचिव श्री विनोद सुमन सहित वन विभाग, राजस्व, लोनिवि, एनएच, बीआरओ के अधिकारी उपस्थित थे।

हिमालय पूरे देश और दुनिया का: मुख्यमंत्री

देहरादून: मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने हिमालय दिवस की पूर्व संध्या पर जारी अपने संदेश में कहा कि हिमालय एक व्यक्ति विशेष का नहीं, एक समाज का नहीं, एक राज्य विशेष का नहीं, ये पूरे देश और दुनिया का है। इसलिए आवश्यक हो जाता है की हम इस हिमालय दिवस पर देश और दुनिया का ध्यान इसकी ओर आकर्षित करे और सभी लोग सामूहिक रूप से संकल्प ले की हम हिमालय को बचायेंगे।

हिमालय उत्तराखंड के लिए एक वरदान

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने कहा कि हिमालय विश्व की महानतम पर्वत श्रंखला है। हिमालय अपनी नदियों और जलवायु से पूरे भारत को एक सूत्र में पिरोता है। हमारा राज्य हिमालयी क्षेत्र का नवीनतम राज्य है। गंगा, यमुना और कई जीवनदायिनी नदियाँ यहाँ से निकलती हैं। हिमालय उत्तराखंड के लिए एक वरदान है क्यूँकि यहाँ आस्था के प्रतीक चारधाम तो स्थित है ही साथ ही इसकी मनोरम वादियां और प्राकृतिक संसाधन, पर्यटन एवं आर्थिक विकास के लिए अपार संभावनाएं उपलब्ध करवाते है।

सरकार की नीतियों से जुड़ना समय की मांग

पलायन एवं बेरोजगारी जैसी चुनौतियों से पार पाने के लिए हिमालय के सभी संसाधनों को सरंक्षित रखते हुए उनका पूरी तरह से सदुपयोग करना आज समय की मांग है।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने कहा कि हिमालयी संसाधनों के संरक्षण और उनके समग्र विकास के लिए एक रोड मैप तैयार कर उसे आम जनजीवन और सरकार की नीतियों से जुड़ना समय की मांग है।

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