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रोजाना 50 किलो से अधिक कूड़े को जैविक विधि से खुद ही करना होगा नष्ट

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हल्द्वानी : अधिक कूड़ा उत्पन्न करने वाले निजी संस्थान और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के लिए चिंता बढ़ाने वाली खबर है। नगर निगम ऐसे संस्थानों व व्यवसायिक प्रतिष्ठानों से कूड़ा उठान बंद करने जा रहा है, जहां रोजाना 50 किलो से अधिक कूड़ा पैदा होता है। ऐसे प्रतिष्ठानों को अपने यहां उत्पन्न कूड़े को जैविक विधि से खुद ही नष्ट करना होगा।

दरअसल, स्वच्छ भारत मिशन के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोग्राम के तहत नगर निगम अपने क्षेत्र के कूड़े का उठान कर उसे नष्ट करता है। इसके लिए संबंधित से तय शुल्क लिया जाता है। वर्तमान में रोजाना 100 किलो से अधिक कूड़ा उत्पन्न करने वाले संस्थानों से निगम कूड़ा उठान नहीं करता। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के प्रावधान में बदलाव कर दिया गया है। अब ऐसे निजी अस्पताल, स्कूल, होटल, रेस्टोरेंट आदि भी इसके दायरे में आ जाएंगे जहां रोजाना 50 किलो से अधिक कूड़ा उत्पन्न होता है। ऐसे में संस्थानों की चिंता बढ़ सकती है।

नैनीताल छावनी स्वयं नष्ट करती है कूड़ा नैनीताल छावनी के भीतर कूड़ा प्रबंधन का अपना सिस्टम है। छावनी में जैविक और अजैविक कूड़े को अलग-अलग किया जाता है। जैविक कूड़े की जैविक खाद बनती है, जबकि रिसाइक्लिंग होने वाले अजैविक कचरे को बेच दिया जाता है। बता दें कि बेहतर कूड़ा प्रबंधन की वजह से नैनीताल छावनी ने स्वच्छता सर्वेक्षण में देशभर में पहला स्थान प्राप्त किया था। हल्द्वानी जेल प्रशासन भी अपना कूड़ा खुद नष्ट करता है।

स्वास्थ्य अनुभाग शुरू करेगा सर्वे

नगर निगम के स्वास्थ्य अनुभाग की टीम कूड़ा उत्पन्न करने वाले संस्थानों का सर्वे करेगी। नगर आयुक्त सीएस मर्तोलिया वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राहुल लसपाल को इसके निर्देश दे दिए हैं। मूल्यांकन करेगा नगर निगम कूड़े को सही तरीके से नष्ट किया जा रहा है या नहीं, निगम प्रशासन इसकी समय-समय पर निगरानी करेगा। कूड़े को खुले में फेंकने वाले प्रतिष्ठान पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। कई लोग रात्रि में अपने वाहनों से कूड़े को ट्रंचिंग ग्राउंड भिजवाते हैं, ऐसे लोगों पर भी नजर रहेगी।