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मुख्यमंत्री ने मान ली किसानों की मांग

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मुंबई: महाराष्ट्र सरकार कर्जमाफी और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग को लेकर मुंबई में डटे किसानों को मनाने में जुटी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार दोपहर विधानसभा में किसानों के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की। करीब तीन घंटे तक चली बैठक के बाद सरकार ने मांगों पर लिखित भरोसा देने की बात कही है। बता दें कि आजाद मैदान में डटे करीब 30 हजार किसान विधानसभा घेरने पर अड़े हैं। फडणवीस किसानों की मांग के प्रति सकारात्मक रुख की बात कह चुके थे।

कुछ मांगों पर देंगे लिखित आश्वासन

सिंचाई मंत्री गिरीश महाजन ने मुलाकात को सकारात्मक बताते हुए किसानों की सभी मांगों पर चर्चा किए जाने की बात कही। उन्होंने बताया, ‘उनकी करीब 12-13 मांगें थीं जिनमें से कुछ हमने मांग ली हैं और उन पर हम लिखित ड्राफ्ट देंगे। मुझे लगता है कि वे हमारे फैसले से संतुष्ट हैं।’

6 महीने के अंदर किया जाएगा लागू

बता दें कि किसानों की महत्वपूर्ण मांगों में से एक जमीन किसानों के नाम पर करने की मांग मान ली गई है। आदिवासी विकास एवं जनकल्याण मंत्री वी सावरा ने बताया कि किसानों की शिकायत है कि जो उनकी जमीन है उससे कम उनके नाम पर है, तो जितनी भी जमीन पर वे खेती कर रहे हैं वह उनके नाम पर होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने यह मांग मान ली है। मुख्य सचिव इसे देखेंगे और 6 महीने के अंदर इसे लागू किया जाएगा।

सरकार किसानों की मांग के प्रति सकारात्मक: मुख्यमंत्री

मीटिंग से पहले देवेंद्र फडणवीस ने कहा था, ‘हमारी सरकार किसानों की मांग के प्रति सकारात्मक है। मोर्चा के पहले दिन से ही हमलोग किसानों की कई मांगों को लेकर बातचीत की है। शुरुआत से ही जल संसाधन मंत्री गिरिश महाजन किसानों के साथ संपर्क में हैं। हालांकि, किसान पहले से ही मार्च निकालने को लेकर अटल थे।’

 

सीएम ने अन्य नेताओं के साथ भी की बैठक

इस बीच किसानों के मार्च का मसला महाराष्ट्र विधानसभा में भी उठा। विपक्ष के नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल ने किसानों की सभी मांगें तत्काल मानने की मांग की। उन्होंने कहा कि अगर किसानों की मांग नहीं मानी तो उनके श्राप से सरकार भस्म हो जाएगी। इस बीच फडणवीस खुद किसानों को मनाने में जुट गए हैं। विधानसभा में सीएम ने अन्य नेताओं के साथ बैठक भी की है।

किसान नेता अजित नवले ने कहा है कि एक भी मांग नहीं मानी तो किसान आजाद मैदान में ही अन्न त्याग कर देंगे। वहीं महाराष्ट्र सरकार के जल संसाधन मंत्री ने कहा, ‘मुझे लगता है कि हम उनके 80-90 प्रतिशत मुद्दों का समाधान कर देंगे। हम उनकी मांगों को लेकर गंभीर हैं और हम सबसे अच्छे फैसले लेंगे।’

 

किसानों की लिए राजनीतिक वाद-विवाद दरकिनार करते हुए सियासी दल उनकी खिदमत में जुट गए हैं। समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता किसानों को खाना खिलाने पहुंचे। शिवसेना और जमीयत उलेमा महाराष्ट्र भी बढ़-चढ़कर किसानों की मदद कर रहे हैं। इस किसान आंदोलन को सभी गैर-राजनीतिक दलों ने समर्थन दिया है।

राहुल गांधी का आंदोलनकारी किसानों को समर्थन

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आंदोलनकारी किसानों का समर्थन करते हुए कहा कि यह सिर्फ महाराष्ट्र के किसानों का आंदोलन नहीं है बल्कि पूरे देश के किसानों का आंदोलन है। उन्होंने कहा कि पूरे देश के किसानों की समस्या है। इस बीच शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे जहां किसानों के इस मार्च में शामिल हो चुके हैं, वहीं एनसीपी नेता शरद पवार ने भी पार्टी नेताओं को किसानों के मार्च में शामिल होने को कह रखा है।

 

एमएनएस चीफ राज ठाकरे भी आंदोलनकारी किसानों से मुलाकात कर उन्हें समर्थन का ऐलान कर चुके हैं। बता दें कि मुंबई से करीब 150 किलोमीटर दूर नासिक से चला किसानों का हुजूम 5 दिनों के बाद फिलहाल मुंबई के आजाद मैदान में पहुंचा हुआ है। यहां से किसान महाराष्ट्र विधानसभा के घेराव के लिए कूच करेंगे।

क्या हैं किसानों की मांगें:-

-कृषि उपज की लागत मूल्य के अलावा 50 प्रतिशत लाभ दिया जाए।
-सभी किसानों के कर्ज माफ किए जाएं ।
-नदी जोड़ योजना के तहत महाराष्ट्र के किसानों को पानी दिया जाए।
-वन्य जमीन पर पीढ़ियों से खेती करते आ रहे किसानों को जमीन का मालिकाना हक दिया जाए।
-संजय गांधी निराधार योजना का लाभ किसानों को दिया जाए।
-सहायता राशि 600 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 3000 रुपये प्रति माह की जाए।
-स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू किया जाए।

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