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दुनिया, परिवार, दोस्त, काम हर चीज से हो गई थी नफरत

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uknews-prateik babbar

प्रतीक बब्बर ने 10 साल पहले फिल्म ‘जाने तू या जाने ना’ से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी। ‘धोबी घाट’ और ‘आरक्षण’ जैसी फिल्मों में काम करने के बाद वह ड्रग्स की लत में पड़ गए थे। ‘बागी 2’ के बाद इन दिनों वह चर्चा में हैं अपनी नई फिल्म ‘मुल्क’ को लेकर। उनसे हुई एक खास बातचीत:

 

एक लंबे अरसे तक आप ड्रग्स में डूबे रहे?

मेरे मन में कई सवाल थे, जैसे मेरे साथ ऐसा क्यों हुआ? मेरी मां नहीं है। मेरे पापा कहां हैं? मैं खुद को तबाह करने पर आमादा था। मैं मिस गाइड हो चुका था। मुझे दुनिया, परिवार, दोस्त, काम हर चीज से नफरत हो गई थी। उस दौरान मुझे एक अजीब तरह की बेचैनी हुआ करती थी। एक इच्छा या भूख थी, मगर वह भूख गलत चीजों को लेकर लगती थी। उस दौरान मैंने खुद को खो दिया था। मैं अपने हालात को स्वीकार नहीं कर पाया।

पापा राज बब्बर के साथ आपका रिश्ता कैसा है?

वह मेरी कई बातें टाल जाया करते थे और मुझसे काफी नाराज भी थे। अपने बारे में ऐसी कोई चीज नहीं, जो मैंने उन्हें न बताई हो। जब मैं सबसे बुरी हालत में था, तब भी उनको पता था। जब मैं दारू और ड्रग्स पीकर आता था, तब भी उनसे कह देता था कि पापा मैं ऐसा हूं। आप मुझे अच्छा या बुरा जो भी समझें, मैं ऐसा ही हूं। मैं उनके साथ हमेशा से ईमानदार रहा हूं। वह मुझ पर काफी गुस्सा हुआ करते थे, ‌मगर उन्होंने मेरी कई चीजों को अपनाया भी। उस वक्त वह मुझसे काफी नाराज रहा करते थे। मुझे जिंदगी को समझने में काफी वक्त लगा।

आपकी जिंदगी के आदर्श कौन रहे हैं?

मेरे नाना-नानी और थोड़ी बहुत मेरी मां, हालांकि मैं अपनी मां को जानता नहीं हूं, वह तो मेरी पैदाइश के वक्त चली गई थीं। मगर वह मेरी जिंदगी में सबसे बड़ी शख्सियत रही हैं। वह मुझे बहुत ज्यादा प्रभावित करती हैं। मैं जब अपने चारों तरफ देखता हूं, तो पाता हूं कि वे कई लोगों को प्रभावित करती हैं। मां के बाद नाना और नानी मेरे आदर्श रहे हैं। उन्होंने मुझे अपने बुरे से बुरे वक्त में बहुत ही खूबी से संभाला। मेरे फैन्स ने भी मुझे बहुत प्रेरणा दी है। इसके बावजूद मेरी जिंदगी में आए बदलाव के लिए मैं अपने माता-पिता को श्रेय दूंगा।

‘मुल्क’ में आप एंटी नैशनलिस्ट की भूमिका निभा रहे हैं, मगर आपके लिए देशभक्त होना क्या है?

मुझे लगता है कि आप अगर एक अच्छे नागरिक हैं और एक अच्छे नागरिक होने के सभी नियम-कानूनों का पालन करते हो, तो आप सच्चे देशभक्त हो। इसके अलावा आप अगर अपने साथ-साथ दूसरे व्यक्ति का भी सम्मान करते हैं, तब भी आप देशभक्त हैं।

अपनी मां के लिए आपके कुछ खास सपने हैं?

बस यही कि मैं मां जैसा बनने की कोशिश करूं। अगर मुझे मौका मिला तो मैं अपना 100 प्रतिशत दूंगा। मुझे पता नहीं है कि मैं उनके जैसा कर पाऊंगा या नहीं। मगर मैं उन जैसा बनना चाहता हूं।

उस लड़की के बारे में क्या कहना चाहेंगे, जिसने आपका जीवन बदल दिया?

वह (सान्या सागर) एक राइटर ,एडिटर, डायरेक्टर और क्रिएटिव प्रड्यूसर हैं। कैमरे के सामने ऑल राउंडर हैं। मैं उनको पाकर खुद को खुशनसीब मानता हूं। वह मेरी जिंदगी में आईं और मेरी जिंदगी को प्यार से भर दिया। वह बहुत इंटेलिजेंट हैं। मैं उन्हें कहता हूं, तुम मेरे लिए एक ऐसा सूत्र हो, जिसके कारण मेरी आगे की पीढ़ी बुद्धिमान और क्रिएटिव होगी। इन सभी गुणों के साथ वह एक कमीडियन भी हैं। वह मेरे परिवारवालों से भी काफी जुड़ी हुईं हैं और उनके साथ शॉपिंग और ट्रिप पर भी जाती हैं। वह मेरी जिंदगी की जरूरत बन चुकी है।

आपने कभी कोई नियम-कानून तोड़ा है?

मैंने कई बार ट्रैफिक लाइट तोड़ी और स्पीडिंग की है। इसके अलावा कॉलेज बंक, परीक्षा के दौरान नकल और चीटिंग भी की है। मैं कई गैरकानूनी चीजें कर चुका हूं, हालांकि मुझे उस पर कोई गर्व नहीं है।

इन दिनों आप फिटनेस पर भी काफी ध्यान दे रहे हैं।

मैं फिटनेस के प्रति एक फिल्म के दौरान आकर्षित हुआ था। वह फिल्म थी, इसक। उस बदलाव को लोगों ने काफी पसंद किया। जब आईने के सामने मैं खुद को पसंद करने लगा, तो मैंने फिटनेस की उस प्रक्रिया को और आगे बढ़ाया। पांच महीने में मैंने खुद पर काफी मेहनत की है।

मेरे ट्रेनर हमेशा मेरे सिर पर बैठ कर मुझसे एक्सरसाइज करवाते रहते हैं। उसका रिजल्ट देख कर हर कोई खुश था। अब यह अनुशासित और संयमित लाइफ स्टाइल मुझे पसंद आने लगी है। इसके बावजूद मैं सिगरेट नहीं छोड़ पा रहा हूं, हालांकि कम जरूर हुई है। मैं पहले एक दिन में चालीस सिगरेट पीता था, अब दस पर आ गया हूं। सभी बुरी चीजें छूट गईं, मगर सिगरेट की लत अभी बाकी है।