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अगर किसी दिन आपको पानी न मिले तो क्या होगा?

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नई दिल्ली: आज अंतरराष्ट्रीय जल दिवस है। आपको यह जरूर पता होगा कि दुनिया के कई देश युद्ध, हिंसा और आपदा से जूझ रहे हैं लेकिन इस बात को कम ही लोग महत्व देते हैं कि लगभग हर देश जल संकट का सामना कर रहे हैं। हम बचपन से सुनते आए हैं कि पानी ही जिंदगानी है पर जरा सोचिए, अगर किसी दिन आपको पानी न मिले तो क्या होगा?

आज है अंतरराष्ट्रीय जल दिवस

हो सकता है कि हमें वह दिन देखना न पड़े पर जिस तेजी से पानी की बर्बादी हो रही है, हम नहीं तो हमारी आनेवाली पीढ़ी को जरूर पानी के बड़े संकट से गुजरना होगा।पानी के लिए तीसरे विश्व युद्ध की भी आशंका जताई जा रही है। क्या आप जानते हैं कि दुनिया में साफ-सुथरा पानी कितने लोगों को मिल पाता है? उन्हें पानी के लिए कितना जद्दोजहद करना पड़ता है और इसके बदले में वे कितना भुगतान करते है?

आइए कुछ पॉइंट्स से समझते हैं

– अपने देश में शुद्ध पेयजल करीब 7.5 करोड़ लोगों की पहुंच से दूर है। गंदे पानी से होनेवाली बीमारियों के चलते हर साल भारत में करीब 1.4 लाख बच्चे मारे जाते हैं। प्रति व्यक्ति आय के हिसाब से भारत में लोग 17 फीसदी पैसा पानी पर खर्च करते हैं।

साफ पानी मयस्सर नहीं

– सुरक्षित पेयजल से दुनिया की करीब 2.1 अरब आबादी महरूम है। दुनियाभर में हर साल 3.4 लाख बच्चों (5 साल से कम उम्र के) की मौत डायरिया से हो जाती है। दुनिया में हर 10 में से 4 लोग पानी की कमी से प्रभावित हैं।

घट रही पानी की उपलब्धताuknews-water and wastewater globe

– भारत में प्रति व्यक्ति के हिसाब से सालाना पानी की उपलब्धता में तेजी से गिरावट हो रही है। 2001 में यह 1,820 क्यूबिक मीटर था, जो 2011 में 1,545 क्यूबिक मीटर रह गया। 2025 में इसके घटकर 1,341 क्यूबिक मीटर और 2050 तक 1,140 क्यूबिक मीटर बचने की आशंका जताई गई है।

– एक बार इस्तेमाल होने के बाद 80 फीसदी पानी को बिना शोधित किए या फिर से उपयोग किए बहा दिया जाता है। धरती पर 70 फीसदी पानी मौजूद है और इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल खेती और इससे जुड़े कार्यों में किया जाता है।

गरीब देशों में बढ़ीं बीमारियां

– प्रदूषित पानी पीने और साफ-सफाई के अभाव में दुनिया के गरीब देशों में बीमारी और बदहाली तेजी से बढ़ रही है। दुनिया में 2.3 अरब लोगों के पास शौचालय जैसे स्वच्छता के प्राथमिक संसाधन नहीं हैं।

– एक छोटा सा देश है पापुआ न्यू गिनी। यहां हर दिन 50 लीटर पानी के लिए प्रति व्यक्ति आय का 54 फीसदी हिस्सा खर्च करना पड़ता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार देश की 60 फीसदी आबादी की पहुंच में पीने का साफ पानी नहीं है।

– असुरक्षित जल स्रोतों से पानी पीनेवाले आधे से ज्यादा लोग अफ्रीकी देशों के हैं। गरीबों को पानी के लिए ज्यादा संघर्ष करना पड़ता है। अफ्रीका के कई देशों में ज्यादातर लोगों को पानी जुटाने के लिए 30 मिनट खर्च करना पड़ता है। कुछ देशों के लोगों को तो 1 घंटे से ज्यादा भी लग जाता है। दुखद यह भी है कि पानी इकट्ठा करने की पूरी जिम्मेदारी लड़कियों और महिलाओं की होती है।

पानी का ऐसा है हाल…

– मंगोलिया अकेला ऐसा देश है जहां पानी जुटाने की बराबर जिम्मेदारी लड़कों और पुरुषों की होती है। वहीं, दक्षिण अफ्रीका के कुछ प्रांतों में 60% से ज्यादा परिवारों को 2-3 दिन में एक बार ही पानी नसीब होता है।

– दिल्ली में पानी का संकट किसी से छिपा नहीं है। यमुना प्रदूषित हो चुकी है, सप्लाइ का पानी कम ही घरों तक पहुंचता है, ऐसे में टैंकर से पानी जुटाने के लिए लोगों को काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है। मध्य प्रदेश, राजस्थान के कई इलाकों में भी पानी का गंभीर संकट है।

– पानी की कमी के कारण अपने देश में खरीफ की फसलों की बुआई में कमी आई है।

– ऐसे में पानी के दोबारा इस्तेमाल से, रोजमर्रा के कामों में पानी का उपयोग कम करके हम जल संरक्षण में अपना योगदान कर सकते हैं।

इन पौधों के बारे में जानें

– यहां यह जानना भी जरूरी है कि पेड़-पौधों से जल चक्र बेहतर रहता है और आपदा से बचाव होता है। एक तरफ एक यूकेलिप्टस का वृक्ष प्रतिदिन 24 गैलन पानी अवशोषित करता है तो वहीं बांज और बुरांस अपनी जड़ों में पानी को संरक्षण करनेवाले पौधे माने जाते हैं, जो हिमालयी क्षेत्र में पाए जाते हैं। इसके अलावा भी कई पौधे हैं जो पानी का संरक्षण करते हैं।