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कार्डिएक अरेस्ट और हार्ट अटैक में है फर्क

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बदलती जीवनशैली ने बढ़ाया दिल की बीमारियों का खतरा

हिंदी फिल्मों की मशहूर अभिनेत्री श्रीदेवी की अचानक मौत से फिल्म जगत के अलावा हर कोई हैरान है। कार्डिएक अरेस्ट (हृदय गति रुकना) से शनिवार रात दुबई में उनकी मौत हो गई थी, जबकि वह सिर्फ 54 साल की थीं और हमेशा फिट नजर आती थीं।

30 साल के युवा भी दिल की बीमारियों का हो रहे शिकार

इस बारे में सीनियर कार्डियॉलजिस्ट डॉ. मनीष मित्तल का कहना है कि बदलती जीवनशैली और टेंशन ने दिल की बीमारियों का खतरा पहले से कहीं ज्यादा बढ़ा दिया है। पहले माना जाता था कि वैसे लोग जो मोटापे के शिकार हैं, ज्यादा तला भुना और चिकनाई वाला खाना खाते हैं और शराब का ज्यादा सेवन करते हैं उन्हें ही दिल की बीमारी होती है, लेकिन अब 30 साल के युवा भी दिल की बीमारियों का शिकार हो रहे हैं।

कार्डिएक अरेस्ट और हार्ट अटैक में अंतर

डॉ. मनीष ने बताया कि दिल की बीमारी में सामान्य रूप से मौत दो कारणों से होती है। पहला हार्ट अटैक और दूसरा कार्डिएक अरेस्ट। कुछ लोग इन दोनों में फर्क नहीं समझ पाते हैं। कार्डिएक अरेस्ट और हार्ट अटैक में फर्क है।

– हार्ट मसल्स में जब ब्लड की सप्लाई किसी कारण से डिस्टर्ब हो जाती है या फिर प्रभावित हो जाती है तो हार्ट अटैक पड़ता है। इस स्थिति में दिल शरीर के दूसरे हिस्सों को ब्लड सप्लाई करता रहता है।

– कार्डिएक अरेस्ट में दिल अचानक ही शरीर में ब्लड पंप करना बंद कर देता है। ऐसे में वह शख्स अचानक से बेहोश हो जाता है। या तो वह सांस लेना बंद कर देता है या फिर नॉर्मल तरीके से सांस ले नहीं पाता। मेडिकल के शब्दों में इसे इलेक्ट्रिक कंडक्टिंग सिस्टम का फेल होना कहा जाता है।

हालांकि अगर 10 मिनट के अंदर मेडिकल सुविधा मिल जाए तो मरीज को बचाया जा सकता है। इसमें दिल और सांस रुक जाने के बावजूद दिमाग जिंदा होता है। जिस शख्स को पहले हार्ट अटैक पड़ चुका है, उसे कार्डिएक अरेस्ट होने की आशंका बहुत अधिक होती है।

दिल के रोग बढ़ने के हैं कई कारण

जिला एमएमजी अस्पताल के सीनियर कार्डियॉलजिस्ट डॉ. सुनील कात्याल ने बताया कि बदलते समय में लोगों की जीवनशैली पूरी तरह से बदल चुकी है। रात में देर तक जागना, सुबह देर तक सोना, फिजिकल वर्क न करना और खानपान में अनियमितता। इसके अलावा हमेशा तनाव में रहना और नशीले पदार्थों का सेवन करना भी इसका एक कारण है।

डॉ. कात्याल ने बताया कि उनके पास प्रतिदन 100 से 150 मरीज आते हैं। इनमें 40 फीसदी 40 से कम आयु वाले होते हैं। उन्हें घबराहट, धड़कनों का असामन्य होना, हाई या लो बीपी जैसी बीमारियां होती हैं। ऐसे मरीजों में फिजिकल वर्क न करना और अनियमित दिनचर्या और खान-पान जैसी बातें कॉमन होती हैं।

अचानक होता है कार्डिएक अरेस्ट

सामान्य रूप से कार्डिएक अरेस्ट अचानक होता है और बॉडी कोई पूर्व चेतावनी भी नहीं देती है। 30 साल की उम्र के बाद ऐसिडिटी या अस्थमा के दौरे इसका संकेत हैं।

इन संकेतों को न करें नजरअंदाज

– 30 सेकंड से ज्यादा छाती में होने वाला दर्द

– छाती के बीचोंबीच भारीपन

– हल्की जकड़न या जलन

– थकावट के समय जबड़े में होने वाला दर्द

– सुबह छाती में होने वाली बेचैनी

– थकावट के समय सांस का फूलना

– छाती से बाईं बाजू और पीठ की ओर जाने वाले दर्द

– बिना वजह आने वाले पसीने और थकावट

किसी भी उम्र में हो सकती है दिल की बीमारी

दिल की बीमारी किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है। किसी व्यक्ति में हार्ट अटैक की संभावना केवल शरीर में कलेस्ट्रॉल या बॉडी मॉस के आधार पर नहीं होती। हार्ट अटैक के विभिन्न कारण होते हैं।

हाई लिपिड प्रोफाइल, विशेषकर हाई कलेस्ट्रॉल, दिल की बीमारी के खतरनाक कारणों में से एक है। इसके अतिरिक्त हाइपरटेंशन और डायबीटीज के रोगियों को यह बीमारी हो सकती है। इसमें अनुवांशिक होना भी एक कारण हो सकता है।

महिलाओं में दिल की बीमारी है अलग

डॉ नीरज भल्ला ने कहा कि महिलाओं की समस्या यूनीक होती है। उनमें पेट में गैस बनना, जबड़े में दर्द, चक्कर आना दिखता है। पोस्ट मेनॉपॉज के बाद महिलाओं में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।

डॉ राहुल चौधरी का कहना है कि मेनॉपॉज के दौरान महिलाओं के अंदर एस्ट्रोजेन नामक हॉर्मोन बनता है जो उन्हें दिल की बीमारियों से बचाता है। 50 साल के आसपास मेनॉपॉज बंद हो जाता है तो बॉडी में इस हॉर्मोन की कमी हो जाती है। इसके बाद महिलाओं में दिल की बीमारी बढ़ने का खतरा रहता है।

पुरुष और महिला में दिल की बीमारी का औसत होता है 3:1

डॉक्टरों का कहना है कि आमतौर पर पुरुष और महिला में दिल की बीमारी का औसत 3:1 होता है लेकिन मेनॉपॉज के बाद यह बराबर हो जाता है।

कैसे बच सकती है जान

अगर आपके सामने किसी को कार्डिएक अरेस्ट हो तो पहले 10 मिनट बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। हर मिनट के साथ बचने की संभावना 10 प्रतिशत कम हो जाती है।

– मरीज के कपड़ों को ढीला कर दें।

– अगर वह पहले से ही दिल का रोगी है और कोई दवा लेता है तो उसे दवा दें।

– उसके बाद ऐसे मरीज को किसी ठोस जगह पर लिटा दें।

– उसकी नाक और गला चेक करें कहीं कुछ अटक तो नहीं गया है।

– हथेली से छाती पर दबाव डालकर मुंह से कृत्रिम सांस देना मरीज की जान बचाने में सहायक होता है।

– मरीज के सीने के बीचों-बीच हथेली रखकर पंपिंग करते हुए 2-3 बार ऐसा करने से धड़कन फिर से शुरू होने की संभावना बन जाती है।

– प्रति मिनट में 100 बार दबाना होता है।

– इसके साथ ही मरीज की नाक को दो उंगलियों से दबाकर मुंह से सांस दें। नाक बंद होगी तो मुंह से दी गई सांस फेफड़ों तक पहुंचती है।

– इस तकनीक से 50 फीसदी लोगों की जान बचाई जा सकती है।

फैमिली हिस्ट्री हो तो बढ़ जाती है आशंका

– परिवार में किसी को दिल की बीमारी होने पर 3 गुना रहता है खतरा

– फैमिली हिस्ट्री के साथ डायबीटीज हो तो 6 गुना तक बढ़ जाती है आशंका

– फैमिली हिस्ट्री और डायबीटीज के साथ स्मोकिंग करते हैं तो 15 गुना बढ़ जाता है खतरा

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