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आजादी के 70 साल बाद भी उत्तराखंड समेत मध्य हिमालयी क्षेत्र को लेकर केंद्र सरकार सुनियोजित विकास की कोई योजना नही बना सकी है। उत्तराखंड पहले उत्तर प्रदेश का हिस्सा था। सूबे के तीन दिग्गज नेता गोविंद बल्लभ पंत, हेमवती नंदन बहुगुणा और नारायण दत्त तिवारी उत्तर प्रदेश के कई सालों तक मुख्यमंत्री रहे, परंतु उत्तराखंड का पर्वतीय क्षेत्र विकास को तरसते हुए उत्तर प्रदेश और दिल्ली के मैदानी इलाकों में पलायन करता रहा। इसे रोकने के लिए 17 साल पहले 9 नवम्बर 2000 को उत्तराखंड बनाया गया था।

माफियाओं के साथ बड़े राजनेताओं और अफसरों का गठजोड़- सा बन गया

स्वतंत्रता के 70 सालों में उत्तराखंड राज्य का भू, खनन, शराब, वन और शिक्षा माफियाओं से पाला पड़ा है। राज्य में इन माफियाओं के साथ कुछ बड़े राजनेताओं और अफसरों का एक गठजोड़- सा बन गया है जो सूबे के विकास के नाम पर राज्य के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करने में लगा है। उत्तराखंड बनने के बाद यह गिरोह और मजबूत होकर उभरा है।

उत्तराखंड के देहरादून और नैनीताल जिलों में शिक्षा के विकास के नाम पर कुकुरमुत्तों की तरह इंजीनियरिंग, मेडिकल और बी फार्म के कॉलेज जगह दृ जगह खुले और शिक्षा माफियाओं ने जड़ें जमा ली। उच्च शिक्षा आम आदमी के बूते से बाहर हो गई। आजादी से अब तक उत्तराखंड में कृषि और वानिकी के क्षेत्र में कोई ठोस नीति नहीं बन पाई जिससे लोगों का खेती से मोह भंग हो रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता नागेंद्र उनियाल का कहना है कि केंद्र और राज्य की सरकारों की गलत नीतियों के कारण विकास के नाम पर उत्तराखंड विनाश की तरफ जा रहा है।

अनियोजित विकास राज्य के लिए नासूर बन गया

प्राकृतिक संसाधनों का अवैध दोहन कर अनियोजित विकास राज्य के लिए नासूर बन गया है। सूबे में जलवायु परिवर्तन के चलते उत्तराखंड में दैवीय आपदाओं के साथ भूस्खलन की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। अंग्रेजों ने 1916 में भीमगोड़ा बैराज बनाकर हरिद्वार से कानपुर तक गंगनहर निकाली थी। उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल में देहरादून तक तथा कुमाऊंमंडल के नैनीताल जिले के काठगोदाम क्षेत्र तक रेल पटरी बिछाई थी। टिहरी बांध के खिलाफ पर्यावरणविद सुन्दर लाल बहुगुणा ने जबरदस्त आंदोलन छेड़ा। टिहरी विस्थापितों के आंदोलन ने भी बाधाएं खड़ी की। 2006 में टिहरी बांध की एक हजार मेगावाट परियोजना शुरू हुई।

1984 में पौड़ी गढ़वाल में चीला, 1990 में उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में मनेरीवाली जल विद्युत योजना और 2012 में टिहरी डैम का सहायक कोटेश्वर बांध शुरू हुआ। 20 अक्तूबर 1991 में उत्तराखंड के उत्तरकाशी में भूकंप ने भारी तबाही मचाई। यमुना, अलकनंदा और मंदाकिनी नदी दर्जनों बांधों और बिजली परियोजनाओं का भार संभाल रही हैं। पंचेश्वर में पांच हजार चालीस मेगावाट की जलविद्युत परियोजना बनाई जा रही है जिसमें 134 गांवों के 39 हजार परिवार विस्थापित किए जाएंगे। इसके खिलाफ कुमाऊं के सामाजिक संगठन आंदोलनरत हैं।

 

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