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ऐसा पहले कभी नहीं सुना गया: सुप्रीम कोर्ट

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सरकार अगर सिफारिश को वापस भेजती है तो यह उसके अधिकार क्षेत्र में

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने जज के रूप में नियुक्ति संबंधी वॉरंट पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार अगर सिफारिश को वापस भेजती है तो यह उसके अधिकार क्षेत्र में है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने वकील इंदिरा जयसिंह की याचिका को ‘अकल्पनीय’ बताते हुए कहा कि ऐसा पहले कभी नहीं सुना गया है।

 

CJI समेत 3 जजों की बेंच ने याचिका को ‘अकल्पनीय’ बताया

सीनियर वकील इंदिरा जयसिंह ने अपनी याचिका में कहा कि कॉलिजियम की सिफारिश के बावजूद केंद्र सरकार ने केएम जोसेफ को सुप्रीम कोर्ट को जज तौर पर नियुक्ति करने से इनकार कर दिया है। केंद्र सरकार ने इंदु मल्होत्रा को जज के तौर पर नियुक्त करते हुए कॉलिजियम को जस्टिस जोसेफ के नाम पर फिर से विचार करने के लिए कहा है।

100 से ज्यादा वकीलों ने की केंद्र सरकार के फैसले की आलोचना:जयसिंह

वकील इंदिरा जयसिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के 100 से ज्यादा वकीलों ने केंद्र सरकार के फैसले की आलोचना की है। जय सिंह ने कहा, ‘हमें इस बात की जानकारी है कि केंद्र सरकार ने जस्टिस केएम जोसेफ के नाम को तवज्जो क्यों नहीं दी। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि जस्टिस जोसेफ ने केंद्र के उत्तराखंड के राष्ट्रपति शासन के फैसले को खारिज कर दिया था।’

बता दें कि 2016 में केंद्र सरकार ने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाया था, जिसे उत्तराखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस केएम जोसेफ ने खारिज कर दिया था। इसके बाद राज्य में कांग्रेस की सरकार फिर से बहाल हो गई थी।

उत्तराखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस जोसेफ पर सियासी संग्राम

इस मुद्दे पर सियासी संग्राम भी जोरो पर है। कांग्रेस के साथ वाम दलों ने गुरुवार को इसे न्यायापालिका में हस्तक्षेप करार दिया और केंद्र सरकार पर हमला बोला। कांग्रेस के नेता कपिल सिब्बल ने उत्तराखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस जोसेफ को सुप्रीम कोर्ट नहीं भेजने पर केंद्र को आड़े हाथों लिया।

केंद्र ने जस्टिस जोसेफ के नाम को लंबित रखे जाने पर दिए तर्क

दूसरी तरफ केंद्र सरकार ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए पलटवार किया। केंद्र ने जस्टिस जोसेफ के नाम को लंबित रखे जाने पर तर्क भी दिए। कॉलिजियम ने सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति के लिए वरीयता क्रम में जस्टिस जोसेफ को पहले और मल्होत्रा को दूसरे नंबर पर रखते हुए सिफारिश की थी।

केंद्र सरकार ने इंदु मल्होत्रा के नाम को दे दी मंजूरी

केंद्र सरकार ने इंदु मल्होत्रा के नाम को मंजूरी दे दी, लेकिन जस्टिस जोसेफ के नाम को लंबित रखा। सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के कॉलिजियम से कहा कि जस्टिस जोसेफ को शीर्ष अदालत में पदोन्नत करने की अपनी सिफारिश पर दोबारा विचार करे। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जजों के नाम को पुनर्विचार के लिए भेजना सरकार का अधिकार है और कोर्ट इसपर विचार करेगा।

देश में न्यायपालिका की स्वतंत्रता खतरे में: सिब्बल

सिब्बल ने गुरुवार को यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि देश में न्यायपालिका की स्वतंत्रता खतरे में है। उन्होंने कहा, ‘सरकार हाई कोर्ट में अपने लोगों को बैठाना चाहती है। जस्टिस केएम जोसेफ पर कॉलिजियम की अनुशंसा को सरकार पास नहीं कर रही है। जोसेफ सबसे काबिल जजों में शुमार होते हैं, लेकिन केंद्र सरकार उनकी नियुक्ति में अड़ंगा लगा रही है।

केंद्र को लगता है कि वह काबिल ही नहीं है।’ साथ ही सिब्बल ने कहा कि जस्टिस जोसेफ ने ही उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने के एनडीए सरकार के फैसले को पलट दिया था। सिब्बल ने हालांकि सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील इंदु मल्होत्रा को जज बनने की बधाई दी।