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न्यू यॉर्क: डर के माहौल में जिंदा रहने और खुद को मुसीबतों से बचाने के लिए लोग अक्सर अपने बर्ताव और आदतों में बदलाव लाते हैं। अमेरिका में काम करने वाले भारतीय इंजिनियर श्रीनिवास कुचिभोतला की कैंजस में हुई हत्या के बाद वहां रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों में भी यह बदलाव देखा जा रहा है।

अमेरिका में रह रहे तेलंगाना के प्रवासी भारतीयों के एक संगठन ने अपने सदस्यों को तेलुगू में बात ना करने की सलाह दी है। अपने फेसबुक पेज पर दी गई चेतावनी में संगठन ने कहा है कि अमेरिका में रहने वाले तेलुगूभाषी लोग लोगों के सामने और सार्वजनिक जगहों पर अपनी मातृभाषा में बात ना करें।

तेलंगाना अमेरिकन तेलुगू असोसिएशन (TATA) के महासचिव विक्रम जंगम द्वारा अपने सदस्यों को दिए गए ‘टिप्स’ में कहा गया है, ‘सार्वजनिक जगहों पर किसी के साथ बहस ना करें। अगर कोई आपको उकसाए, तब भी आप उसके साथ बहस में मत पड़िए और तुरंत उस सार्वजनकि स्थान से निकल जाइए।

हमें अपनी मातृभाषा तेलुगू से भले ही कितना भी प्यार हो, लेकिन इससे गलत संदेश जा सकता है। सार्वजनिक जगहों पर अंग्रेजी में ही बात करें।’ इन नसीहतों के अलावा, समुदाय के सदस्यों को अकेली और सूनसान जगहों पर ना जाने की भी सलाह दी गई है। साथ ही, किसी भी आपातकालीन स्थिति में 911 पर फोन कर पुलिस सहायता मांगने की भी हिदायत दी गई है।

अपने देश वापस आ जाव मेहनत और मिल कर काम करेगे । ७० साल बाद मोदी जी के आने से माहौल बदल रहा है । परतन्त्र जीवन जहाँ मात्रभाषा न बोल सको क्यो गुलामो की जिन्दगी बिता रहे हो । महौल और खराब होगा , एक दिन स्वदेश आना ही पडेगा ।
TATA के अध्यक्ष महेंद्र रेड्डी मुसुकू ने कहा कि अमेरिका में रहने वाले भारतीयों को एक-दूसरे के साथ ज्यादा सहयोग करना चाहिए। महेंद्र ने कहा कि फिलहाल इस तरह के सहयोग की कमी है। महेंद्र भारत और भारतीयों के बारे में ऑनलाइन और बाकी मंचों पर जागरूकता अभियान शुरू करने की भी योजना बना रहे हैं। उन्होंने बताया, ‘अमेरिकी लोगों के बीच भारतीय संस्कृति और भारतीय लोगों के शांतिपूर्ण स्वभाव को लेकर जागरूकता पैदा करने की मंशा से हम कई तरह के कार्यक्रमों का आयोजन करने की सोच रहे हैं।’अमेरिका की मौजूदा राजनैतिक स्थिति को लेकर मनोचिकित्सक डॉक्टर आवेश शर्मा ने कहा, ‘यह ऐसा ही है जैसे कि हम कहते हैं कि हवाई जहाज में बैठकर बम से जुड़ा कोई मजाक भी मत करो। एक आजाद देश में इस तरह की परेशानियां नहीं होनी चाहिए।

मौजूदा स्थितियों को देखते हुए इंसान धीरे-धीरे कई तरह की सावधानियां बरतना सीख जाता है। सार्वजनिक जगहों पर मातृभाषा का इस्तेमाल ना करना, किसी के साथ बहस या लड़ाई नहीं करना इसी तरह की सावधानियां हैं। यह सावधानी बरतना है, ना कि पागलपन।’

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