Home News National बिना स्पष्ट सहमति के पर्सनल डेटा का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए

बिना स्पष्ट सहमति के पर्सनल डेटा का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए

30
0
SHARE
uknews-consent-must-for-collection-sharing-of-personal

4% तक का जुर्माना लगाने का सुझाव

नई दिल्ली: डिजिटल इकॉनमी की ग्रोथ पर बनी सरकारी समिति का कहना है कि जाति-धर्म, पासवर्ड, सेक्शुअल प्रेफरेंस, आधार और टैक्स डीटेल, ये सब ‘संवेदनशील पर्सनल डेटा’ हैं और बिना स्पष्ट सहमति के इसका इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। जस्टिस बीएन श्रीकृष्ण की अध्यक्षता में बनी कमिटी ने डेटा प्रोटेक्शन लॉ का उल्लंघन करनेवाली कंपनियों पर 15 करोड़ रुपये से लेकर उनके दुनियाभर के कारोबार के कुल टर्नओवर का 4% तक का जुर्माना लगाने का सुझाव दिया है।

ग्राहकों को अपने डेटा तक पहुंचने का अधिकार होना चाहिए

कमिटी ने डेटा प्रोटेक्शन लॉ को लेकर कहा, ‘(यूजर को उसकी) सहमति की जानकारी होनी चाहिए, सहमति स्पष्ट होनी चाहिए और सहमति को वापस लेने का भी लोगों के पास अधिकार होना चाहिए।’ यह रिपोर्ट शुक्रवार को आईटी मिनिस्टर रविशंकर प्रसाद को सौंप दी गई। कमिटी का कहना है कि इंटरनेट के ग्राहकों को अपने डेटा तक पहुंचने का अधिकार होना चाहिए। कमिटी ने बिना जानकारी के डेटा में बदलाव किए जाने को लेकर भी चिंता जताई और ऐसा रोकने के लिए सुझाव दिए।

समिति ने कहा कि इंटरनेट सब्सक्राइबर्स और गूगल, फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लैटफॉर्मों का इस्तेमाल करनेवालों को अपना व्यक्तिगत डेटा किसी भी वक्त हासिल करने का अधिकार होना चाहिए। कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में एक-एक यूजर की पर्सनल प्रोफाइलिंग (यूजर की हर जानकारी इकट्ठा करने) और थर्ड पार्टी ऐप्लिकेशनों के द्वारा यूजर डेटा का अनौपचारिक तरीके संग्रह करने के खिलाफ उठाए जानेवाले कदमों का जिक्र किया है। गौरतलब है कि फेसबुक और कैंब्रिज ऐनालिटिका के डेटा लीक मामले में कुछ इसी तरह की बातें सामने आई थीं।

श्रीकृष्ण कमिटी की रिपोर्ट मील का पत्थर होगी साबित

यह पैनल जुलाई 2017 में डिजिटल इकॉनमी की ग्रोथ के लिए बनाया गया था। इसके साथ ही इसका उद्देश्य पर्सनल डेटा को सुरक्षित करने के लिए सुझाव देना था। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रविशंकर प्रसाद ने कहा, ‘डिजिटल डिवेलपमेंट में श्रीकृष्ण कमिटी की रिपोर्ट मील का पत्थर साबित होगी। इसको ध्यान में रखते हुए कानून बनाया जाएगा।’