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ट्रेड वॉर से जूझ रही दुनिया

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भारत और तुर्की भी इस लड़ाई में उतर चुके हैं

दुनिया इस समय ट्रेड वॉर से जूझ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की संरक्षणवादी नीतियों और ट्रेड टैरिफ को कथित तौर पर हथियार बनाने की कोशिशों ने दुनिया के बड़े मुल्कों को एक अघोषित ट्रेड वॉर जोन में ला खड़ा कर दिया है। इससे वैश्विक बाजार की स्थिरता भी खतरे में पड़ गई है। अमेरिका द्वारा चीन से आयात पर ट्रेड टैरिफ बढ़ाने पर पहले चीन ने पलटवार किया। इसके बाद यूरोपीय यूनियन के साथ-साथ भारत और तुर्की भी इस लड़ाई में उतर चुके हैं।

भारत ने अमेरिका से आने वाले 29 उत्पादों पर सीमा शुल्क बढ़ा दिया है। अब तुर्की भी अमेरिका से आयातित वस्तुओं पर 267 मिलियन डॉलर मूल्य का आयात शुल्क लगाने जा रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस ट्रेड वॉर ने वैश्विक कंपनियों के बीच भरोसे को घटाया है और वैश्विक अर्थव्यवस्था खतरे में है।

अमेरिका ने चीन के 50 अरब डॉलर के सामानों पर लगा दिया था शुल्क

आपको बता दें कि अमेरिका ने पिछले सप्ताह चीन के 50 अरब डॉलर के सामानों पर शुल्क लगा दिया था। इसके जवाब में चीन ने भी अमेरिका के 50 अरब डॉलर के 659 उत्पादों पर शुल्क लगा दिया था। ट्रंप ने चीन को परोक्ष रूप से धमकी दी थी कि वह 200 अरब डॉलर के अतिरिक्त चीनी सामानों पर शुल्क लगाएगा। अब चीन ने इस धमकी पर पलटवार किया है। चीन के वाणिज्य मंत्रालय के मंत्रालय ने कहा कि उनका मुल्क इसके लिए तैयार हो और अगर ऐसा हुआ तो चीन भी इसके जवाब में कदम उठाएगा।

इस ट्रेड वॉर का दुनिया पर दिखने लगा असर

वर्ल्ड इकॉनमी के एक्सपर्ट्स इस ट्रेड वॉर को लेकर गंभीर आशंकाएं जाहिर कर चुके हैं। उनका कहना है कि इसकी वजह से जहां एक और कंपनियों के बीच का भरोसा घट रहा है, वहीं दूसरी ओर यह बढ़ती वैश्विक अर्थव्यवस्था के रास्ते में भी बाधक बन रहा है। इस ट्रेड वॉर का असर भी दिखने लगा है।

मर्सेडीज-बेंज बनाने वाली कंपनी ने अपना लाभ का पूर्वानुमान घटा दिया

सबसे पहले ऑटोमोबाइल कंपनियां इसका शिकार होते दिख रहीं हैं। मर्सेडीज-बेंज बनाने वाली जर्मनी की ऑटोमोबाइल कंपनी डेमलर एजी ने 2018 के अपने लाभ के पूर्वानुमान को घटा दिया है। जनरल मोटर्स और फोर्ड के शेयर जहां एक फीसदी गिरे हैं, वहीं टेस्ला के शेयरों में भी 0.5 फीसदी की गिरावट हुई है।

बीएमडब्ल्यू ने भी कहा है कि उसे इस ट्रेड वॉर की वजह से वह रणनीतिक उपायों की तलाश में है। डेमलर एजी ने कहा है कि उसकी कारों पर चीन द्वारा आयात शुल्क बढ़ा देने से चीन के ग्राहकों की मांग में कमी आएगी। इस वजह से उसे इस साल कम फायदा होगा। आपको बता दें कि अमेरिका द्वारा तमाम वस्तुओं पर आयात शुल्क बढ़ा देने के बाद से यूरोपीय यूनियन, चीन, भारत समेत कई देशों ने तीखी प्रतिक्रियाएं दी हैं।

अमेरिका ने मार्च महीने में आयातित इस्पात पर 25 फीसदी और अल्युमीनियम पर 10 फीसदी का शुल्क लगा दिया था। इससे भारतीय माल पर भी 24.1 करोड़ डॉलर का शुल्क बोझ पड़ा है । भारत ने इसी के जवाब में 29 वस्तुओं पर आयात शुल्क बढ़ा दिया। ट्रंप और अमेरिका का रुख फिलहाल इस ट्रेड वॉर को खत्म करने वाला नहीं दिख रहा है।

बाजार को भुगतने पड़ेंगे गंभीर नतीजे

ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि रॉबर्ट लाइटहाइजर को चीन से आने वाले उन उत्पादों की दूसरी सूची तैयार करने को कहा है जिनके ऊपर 10 प्रतिशत शुल्क लगाया जा सके। उन्होंने कहा कि यदि चीन अपनी आदतों से बाज नहीं आया तो कानूनी प्रक्रियाओं के पूरा होते ही 200 अरब डॉलर के अतिरिक्त चीनी सामानों पर शुल्क लगा दिया जाएगा। अगर ऐसा हुआ तो वैश्विक बाजार को इसके गंभीर नतीजे भुगतने पड़ेंगे।