Home Dehradun उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहरों को चित्रित गीत का ऑडियो-वीडियो लांच

उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहरों को चित्रित गीत का ऑडियो-वीडियो लांच

वित्त मंत्री ने किया लांच, गीतकार भूपेंद्र बसेडा ने लिखा और गाया है गीत

66
0
SHARE

देहरादून। वित्त एवं संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पन्त ने 17 न्यू कैंट रोड हाथीबड़कला, देहरादून स्थित अपने शासकीय आवास में अपरान्ह् 4.30 बजे उत्तराखण्ड राज्य पर आधारित गीत के ऑडियो-वीडियो का यू-ट्यूब के माध्यम से लॉन्च किया गया। उक्त गीत को भूपेन्द्र बसेड़ा, द्वारा लिखा और स्वर प्रदान किया गया है। बसेड़ा उत्तराखण्ड सचिवालय में निजी सचिव के पद पर हैं तथा वर्तमान में मंत्री प्रकाश पंत के साथ सम्बद्ध हैं।
गीत में उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक धरोहरों, धार्मिक, पर्यटनस्थलों, जीवनदायनी पवित्र नदियों, राज्य पशु, पक्षी, फूल, उत्तराखण्ड के वीर महापुरूषों-मातृशक्ति के साथ देश की सेवा में तैनात जवानों का सुन्दर वर्णन किया गया है। बसेड़ा द्वारा गीत में सम्पूर्ण उत्तराखण्ड को चित्रित-संजोने का अच्छा प्रयास किया है। इस गीत का संगीत जाने माने संगीतकार संजय कुमोला द्वारा तैयार कर चार चांद लगा दिये हैं। उत्तराखण्ड राज्य पर आधारित इस गीत को तैयार कराने में कैबिनेट मंत्री प्रकाश पन्त का विशेष योगदान रहा है तथा जिनके मार्गदर्शन में व मंत्री के साथ सम्बद्ध सम्पूर्ण स्टॉफ के सहयोग और समर्थन से चित्रित कराया गया है। बता दें बसेड़ा द्वारा पूर्व में भी दो काव्यसंग्रह (नशा, काल कोठरी) का प्रकाशन कराया जा चुका है तथा विगत पांच वर्षों से उत्तराखण्ड सचिवालय बैडमिंटन क्लब की वार्षिक स्मारिका ‘‘प्रयास’’ बेहतर कल का सम्पादन निरन्तर किया जा रहा है।

गीत के बोल …

मनभावन और पावन धरती, हिमगिरि माथे चमक रहा है, गंगा, यमुना, काली, सरयू, पिन्डर का जल छलक रहा है। हृदय में हैं चारों धाम, वेद-पुराणों में जिसका बखान। उत्तराखण्ड तू नयनाभिराम, जय हो-जय हो तुम्हें प्रणाम।। ऋषि-मुनियां की कर्मभूमि, जननी है जीवन दर्शन की, कोटि-कोटि देवों का वास, वन्यजीव सिंह गर्जन भी। ताल-सरोवर, कुण्ड तमाम, ब्रहृमकमल, कस्तूरा शान, पुण्य-धरा तेरा रूप महान, जय हो….. हरिद्वार, ऋषिकेश, मसूरी, औली, जागेश्वर, नैनीताल, ओम पर्वत, पंचाचूली, बिनसर, वेदनी-बुग्याल। हेमकुण्ड साहिब, पिरान कलियर, अद्भुत सारे तीर्थस्थान, देवधरा तुम हो वरदान, जय हो….. ढोल-दमाऊ, रणसिंघे, हुड़के की थाप निराली है, जागर, झोड़ा, थड्या, चौफला, शैली पांडवों वाली है। मशकबीन, तुरतुरी की तान, छलिया नृत्य तेरी पहचान, नन्दा-जात के छत्र-निशान, जय हो… माधो, चन्द्र सिंह, सुमन, गबर सिंह, ऊधम सिंह जैसे लाल कमाल, अन्न-धन से सम्पन्न तराई, उच्च शिखर, वन, घुघुती, मोनाल। सृष्टि समर्पित शिक्षा, ज्ञान, तुमसे जुड़ा है जग-कल्याण, गर्वित हैं हम, है अभिमान, जय हो….. महापुरूष, कवि, लेखक जन्मे, हे माटी! तेरे ऋणी हैं हम, तेरे आँचल की छाया में, पुष्पित हैं सब जाति-धरम। सेना में घर-घर से जवान, मातृशक्ति गौरा-तीलू समान, धन्य हैं हम तेरी सन्तान, जय हो….

LEAVE A REPLY